राज्यसभा की जंग तेज! BJP ने उतारे 4 और दिग्गज चेहरे, पहली बार संसद जाएंगे ये बड़े नेता
16 मार्च को होगा मतदान… महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक सियासी बिसात बिछी, महायुति गठबंधन मजबूत स्थिति में

राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार को चार और उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
घोषित नामों में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, रामराव वडकुते और माया चिंतामण ईवनाते शामिल हैं।
पहली बार राज्यसभा जाएंगे विनोद तावड़े
बुधवार को जारी सूची के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले एक और कार्यकाल के लिए तैयार हैं।
वहीं भाजपा के महासचिव विनोद तावड़े पहली बार राज्यसभा का रुख करेंगे। इसके अलावा रामराव वडकुते और माया चिंतामण ईवनाते को भी पार्टी ने मैदान में उतारा है।
इससे पहले पार्टी ने छह राज्यों से नौ उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी।
16 मार्च को चुनाव, 37 सीटों पर मुकाबला
दस राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 16 मार्च को आयोजित किए जाएंगे और उसी दिन मतगणना भी होगी।
इन राज्यों में सीटें खाली हो रही हैं:
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महाराष्ट्र (7)
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तमिलनाडु (6)
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पश्चिम बंगाल (5)
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बिहार (5)
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ओडिशा (4)
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असम (3)
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हरियाणा (2)
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तेलंगाना (2)
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छत्तीसगढ़ (2)
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हिमाचल प्रदेश (1)
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 मार्च तय की गई है।
पहले घोषित किए गए ये नाम
मंगलवार को पार्टी ने ओडिशा से मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया था।
बिहार से शिवेश कुमार और हरियाणा से पूर्व लोकसभा सांसद संजय भाटिया को टिकट दिया गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने बताया कि सभी नामों को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की मंजूरी मिल चुकी है।
महाराष्ट्र में भाजपा मजबूत स्थिति में
महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में 230 से अधिक विधायकों के साथ भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन मजबूत स्थिति में है। ऐसे में पार्टी अपने चारों उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
महाराष्ट्र से जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें शरद पवार, रामदास अठावले, प्रियंका चतुर्वेदी, रजनी पाटिल, धनंजय पाटिल और भगवत कराड जैसे नाम शामिल हैं।
सियासी संदेश क्या?
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति साफ नजर आ रही है — अनुभवी चेहरों के साथ नए नेताओं को मौका देकर पार्टी संगठन और सहयोगी दलों को साधने की कोशिश में है।
अब नजर 16 मार्च पर है, जब साफ होगा कि किसकी रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।









