खुश हो जाइये! अब पेट्रोल की किल्लत हो जायेगी खत्म, आ रहा 100% इथेनॉल, सरकार के इस बड़े फैसले से आधी हो जाएगी कीमत?

Rejoice! The petrol shortage will end, 100% ethanol is coming, and this major government decision will cut prices in half.

नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की किल्लत से जल्द ही निजात मिलने वाली है। देश में अब सस्ता तेल मिलेगा। भारत में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार अब पूरी तरह स्वदेशी ईंधन इथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है।

इसके तहत अगले दो वर्षों में देशभर में 100 प्रतिशत इथेनॉल यानी E100 ईंधन उपलब्ध कराने वाले 5,000 फ्यूल स्टेशन खोले जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे न केवल कच्चे तेल के आयात पर होने वाला भारी खर्च कम होगा, बल्कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस योजना को लेकर तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ हाई-लेवल बैठक की है। बैठक में E100 ईंधन के उत्पादन, वितरण और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विस्तार को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा की गई।सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए चरणबद्ध टाइमलाइन भी तय कर दी है। शुरुआती चरण में अगले एक महीने के भीतर दिल्ली, मुंबई, पुणे और नागपुर में E100 ईंधन के 150 रिटेल आउटलेट शुरू किए जाएंगे।

इसके बाद अगले 6 से 12 महीनों के भीतर दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में करीब 500 नए आउटलेट खोले जाएंगे। वहीं अगले 24 महीनों में पूरे देश में 5,000 E100 फ्यूल स्टेशन संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।सरकार के इस फैसले के साथ अब ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए भी रास्ता साफ हो गया है। मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स, टोयोटा, महिंद्रा, हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस जैसी कई बड़ी कंपनियां पहले ही फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) के प्रोटोटाइप तैयार कर चुकी हैं।

उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक E100 फ्यूल पंपों की कमी और कीमतों को लेकर स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण इन वाहनों को बड़े स्तर पर बाजार में नहीं उतारा जा सका था। लेकिन सरकार की नई योजना के बाद अब इन गाड़ियों के लॉन्च की संभावना तेज हो गई है।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं, जो पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल आधारित ईंधन पर भी चल सकते हैं। इससे पेट्रोल और डीजल की खपत कम होगी और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।वित्त वर्ष 2026 में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर करीब 10.9 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

ऐसे में इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देना सरकार की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बलानी ने कहा कि इथेनॉल का उत्पादन पूरी तरह देश के भीतर होता है, जिससे करोड़ों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाला इथेनॉल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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