बिजली उपभोक्ताओं के हक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड समेत 15 राज्यों और जम्मू-कश्मीर को नोटिस; जानिए क्या है पूरा मामला
विद्युत नियामक आयोगों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर Energy Watchdog की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्यों से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप है कि रिक्त पदों के कारण बिजली उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में परेशानी हो रही है।

रांची। विद्युत नियामक आयोगों में लंबे समय से खाली पड़े पदों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने झारखंड समेत 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई Energy Watchdog की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियामक आयोगों में पद रिक्त रहने से बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों और विवादों के निपटारे पर असर पड़ रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के बाद प्रतिवादी बनाए गए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। अब संबंधित पक्षों को इस मामले में अपना जवाब देना होगा।
किन राज्यों को जारी हुआ नोटिस?
इस जनहित याचिका में झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड को प्रतिवादी बनाया गया है। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भी इस मामले में शामिल है।
याचिका में संबंधित राज्यों के विद्युत नियामक आयोगों में रिक्त पदों और निर्धारित पदों की स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि आयोगों में पर्याप्त नियुक्तियां नहीं होने से नियामक व्यवस्था के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
आयोगों में पद खाली रहने से उपभोक्ताओं को परेशानी का आरोप
Energy Watchdog की जनहित याचिका में कहा गया है कि कई राज्यों में विद्युत नियामक आयोगों के महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली हैं। कुछ राज्यों में स्वीकृत पदों को भी पूरी तरह नहीं भरा गया है, जबकि कई जगह आवश्यक पदों की स्वीकृति का मुद्दा भी उठाया गया है।
याचिका के मुताबिक, नियामक आयोग बिजली क्षेत्र से जुड़े विवादों, उपभोक्ताओं की शिकायतों और नियामकीय मामलों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में आयोगों में पद रिक्त रहने से उपभोक्ताओं को समय पर राहत मिलने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं, जिन पर संबंधित राज्यों का पक्ष सामने आना बाकी है।
संविधान के अनुच्छेद 21 और विद्युत अधिनियम का हवाला
याचिकाकर्ता ने आयोगों में लंबे समय तक पद खाली रहने को संविधान के अनुच्छेद 21 और विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों से जुड़ा मुद्दा बताया है। याचिका में कहा गया है कि प्रभावी नियामक व्यवस्था और शिकायतों का समय पर निपटारा उपभोक्ताओं के हितों के लिए जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद अब संबंधित राज्यों के जवाब और अदालत में आगे होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी। इस मामले में आगे की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आयोगों में रिक्त पदों को भरने और उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।









