“BJP को वोट नहीं दिया तो वोटर लिस्ट से नाम काट दिया!” केजरीवाल के आरोप से सियासी घमासान, ज्ञानेश कुमार पर भी साधा निशाना; 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अपील
अरविंद केजरीवाल ने भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगाए। फर्जी वोट जोड़ने और विरोधी मतदाताओं के नाम हटाने का दावा, लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील।

नई दिल्ली। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केजरीवाल का दावा है कि देश में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और उनकी जगह कथित तौर पर फर्जी नाम जोड़े जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को वोट नहीं देने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जानकारी जरूरी है।
केजरीवाल ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान लोगों से 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए नागरिकों को आगे आना चाहिए। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा गंभीर है और इसे लेकर आवाज उठाना जरूरी है।
“BJP को वोट नहीं देने वालों के नाम हटाए जा रहे हैं”
अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों ने भाजपा को वोट नहीं दिया, उनके नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जबकि फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं।
केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए लोगों को अपने मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची में कथित बदलावों को लेकर चिंता जताई और देशभर के नागरिकों से विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का आह्वान किया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में केजरीवाल ने कथित रूप से प्रभावित मतदाताओं की संख्या, संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों या अपने दावों के समर्थन में किसी विशिष्ट दस्तावेज का विवरण नहीं दिया है। इसलिए इन आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के आधार पर ही हो सकती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी लगाए आरोप
केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं के नाम हटाने और फर्जी नाम जोड़ने की गतिविधियां खुलेआम हो रही थीं।
इस बयान के जरिए आम आदमी पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करने वाली संस्था की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध विवरण में निर्वाचन आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से केजरीवाल के इन ताजा आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। आयोग का पक्ष सामने आने और संबंधित तथ्यों की जांच के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अपील
अरविंद केजरीवाल ने लोगों से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने इस कार्यक्रम को मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।
केजरीवाल का कहना है कि यदि मतदाता सूची में किसी तरह की गड़बड़ी होती है, तो इसका असर चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसी आधार पर उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया।
प्रस्तावित प्रदर्शन में कितने लोग शामिल होंगे और कार्यक्रम की विस्तृत व्यवस्था क्या होगी, इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। प्रदर्शन को लेकर प्रशासन की ओर से लागू की गई सुरक्षा व्यवस्थाओं और किसी विशेष पाबंदी के बारे में भी विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।
मतदाता सूची में नाम हटाना हमेशा गड़बड़ी नहीं, जांच जरूरी
भारत में मतदाता सूची तैयार करने, उसमें नए नाम जोड़ने और आवश्यक संशोधन करने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की होती है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, विवरणों में सुधार किया जाता है और नियमों के अनुसार अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाया जा सकता है।
ऐसे में मतदाता सूची से किसी नाम का हटना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन यदि किसी मामले में नियमों के विपरीत नाम हटाने या गलत प्रविष्टियां जोड़ने का आरोप है, तो उसकी जांच संबंधित रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए। केजरीवाल के आरोप भी इसी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए ठोस तथ्यों की जरूरत होगी।
प्रदर्शन से पहले सियासी टकराव तेज
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर केजरीवाल के बयान ने भाजपा और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। एक ओर आम आदमी पार्टी इन आरोपों को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है, वहीं दूसरी ओर इन दावों की पुष्टि के लिए तथ्यात्मक साक्ष्य और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
अब 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि भाजपा और निर्वाचन आयोग इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर आगे कौन-से तथ्य सामने आते हैं।









