चाईबासा में गाड़ी दिलाने के नाम पर लाखों की कथित ठगी! मोटर्स कंपनी के सेल्स मैनेजर और सेल्स पर्सन पर गंभीर आरोप, FIR दर्ज
पश्चिमी सिंहभूम के गितीलीपी चौक स्थित शंकराचार्य मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारियों पर ग्राहकों से वाहन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूलने और कंपनी के साथ हेराफेरी करने का आरोप लगा है। कंपनी के प्रतिनिधि की शिकायत पर मुफस्सिल थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

चाईबासा। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में गाड़ी दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने से वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के बीच चिंता बढ़ सकती है। चाईबासा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के गितीलीपी चौक स्थित शंकराचार्य मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारियों पर ग्राहकों से लाखों रुपये वसूलने और कंपनी के साथ हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया है। मामले में कंपनी के प्रतिनिधि महेश कुमार चौहान की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार, ग्राहकों को वाहन उपलब्ध कराने के नाम पर कथित तौर पर रुपये लिए गए। इसके साथ ही कंपनी के साथ भी वित्तीय हेराफेरी किए जाने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित लेनदेन किस तरह हुआ, कितनी राशि की वसूली की गई और पूरे मामले में दोनों कर्मचारियों की क्या भूमिका रही।
सेल्स मैनेजर और सेल्स पर्सन पर लगे गंभीर आरोप
दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के बांंकुरा जिले के जामियारा निवासी विदेश राय शंकराचार्य मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड में सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत था। वहीं, सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह कंपनी में सेल्स पर्सन के रूप में काम करता था।
आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने मिलकर ग्राहकों को गाड़ी दिलाने का भरोसा देकर उनसे रुपये वसूले। शिकायत में कंपनी के साथ हेराफेरी किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता और कथित धोखाधड़ी में दोनों की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
कंपनी के प्रतिनिधि की शिकायत पर FIR दर्ज
मामले को लेकर कंपनी के प्रतिनिधि महेश कुमार चौहान ने मुफस्सिल थाना पुलिस को आवेदन दिया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब जांच के दौरान पुलिस संबंधित दस्तावेजों, रुपये के लेनदेन और शिकायत में बताए गए तथ्यों की पड़ताल करेगी।
पुलिस जांच में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि ग्राहकों से कथित तौर पर कितनी रकम ली गई, क्या उन्हें वाहन उपलब्ध कराया गया और कंपनी के साथ किस तरह की हेराफेरी किए जाने का आरोप है। मामले से जुड़े अन्य तथ्य भी जांच के दौरान सामने आ सकते हैं।
जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरे मामले की तस्वीर
फिलहाल यह मामला आरोपों और दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच के चरण में है। दोनों कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित धोखाधड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।









