गांवों में पानी पहुंचाने में लापरवाही पड़ी भारी! जल जीवन मिशन पर भड़के सरायकेला DC, काम में देरी करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने ग्रामीण पेयजल योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों और संवेदकों को सख्त निर्देश दिए। अधूरे काम जल्द पूरे करने, तैयार योजनाओं को चालू कराने और नल से पानी नहीं पाने वाले गांवों व परिवारों को चिह्नित करने का आदेश दिया गया।

सरायकेला। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों तक नल से साफ पानी पहुंचाने की योजनाओं में देरी को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। काम की धीमी रफ्तार और निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं होने पर उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं को तय समय में पूरा करना होगा और बिना उचित कारण काम में देरी करने वाले संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे संवेदकों को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा भी की जाएगी।
बुधवार को समाहरणालय सभागार में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें पिछली बैठकों में दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई और विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता और संबंधित संवेदक उपस्थित रहे।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पाइपलाइन तक, हर काम की हुई समीक्षा
बैठक के दौरान जल उपचार संयंत्र यानी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, पाइपलाइन बिछाने, बहु-ग्रामीण जलापूर्ति योजना (MVS), एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजना (SVS) और इंटरवेल निर्माण सहित विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और हर घर जल योजना की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
समीक्षा के दौरान कई योजनाओं में काम की धीमी गति सामने आने पर उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और संवेदकों को कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण पेयजल योजनाओं को समय पर पूरा करना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कार्यालय में बैठकर नहीं चलेगा काम, साइट पर जाकर जांचें अधिकारी
उपायुक्त ने अभियंताओं को निर्देश दिया कि वे केवल कार्यालय में बैठकर योजनाओं की समीक्षा करने तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से निर्माण स्थलों का निरीक्षण भी करें। अधिकारियों को काम में देरी के वास्तविक कारणों का पता लगाने और समस्याओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन योजनाओं में बिना उचित कारण देरी हो रही है या निर्धारित मानकों के अनुसार काम नहीं किया जा रहा है, उनके संवेदकों के खिलाफ संविदा की शर्तों और लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जाए। लापरवाही पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर संबंधित संवेदक को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा भी भेजी जाए।
निर्माण पूरा, फिर भी घरों तक नहीं पहुंच रहा पानी तो होगी प्राथमिकता से कार्रवाई
उपायुक्त ने उन योजनाओं को जल्द चालू कराने पर विशेष जोर दिया, जिनका मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन पाइपलाइन बिछाने या अन्य जरूरी काम बाकी हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि ग्रामीणों को जल्द पेयजल की सुविधा मिल सके।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, बहु-ग्रामीण और एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं तथा इंटरवेल से संबंधित अधूरे कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि केवल निर्माण कार्य पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है। योजनाओं को चालू कर ग्रामीण परिवारों तक नियमित रूप से पानी पहुंचाना भी संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की जिम्मेदारी है। पूरी हो चुकी योजनाओं के हस्तांतरण की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने को कहा गया।
जिन गांवों और घरों तक नहीं पहुंचा नल का पानी, उन्हें किया जाएगा चिह्नित
बैठक में जिले के उन टोलों, गांवों और घरों की पहचान करने का निर्देश दिया गया, जहां अब तक नल से पानी पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध नहीं हुई है। उपायुक्त ने कहा कि छूटे हुए क्षेत्रों और परिवारों को योजना से जोड़ने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि पात्र ग्रामीण परिवारों तक पेयजल की सुविधा पहुंचाई जा सके।
इसके साथ ही हर घर जल योजना के तहत लंबित प्रमाणन कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने और योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि कागजों में प्रगति दिखाने के बजाय धरातल पर जलापूर्ति की स्थिति सुनिश्चित की जाए।
हर पात्र ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना लक्ष्य
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों और संवेदकों को लंबित कार्य पूरा करने, तैयार योजनाओं को चालू कराने और छूटे हुए परिवारों तक जलापूर्ति पहुंचाने को प्राथमिकता देनी होगी।
अब प्रशासन की नजर योजनाओं की प्रगति और निर्धारित समय-सीमा के पालन पर रहेगी। काम में अनावश्यक देरी या लापरवाही सामने आने पर संबंधित संवेदकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इससे जिले में ग्रामीण पेयजल योजनाओं को समय पर पूरा कराने और लोगों तक नल से पानी पहुंचाने की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है।









