एग्जिट पोल 2026 ने बढ़ाई धड़कनें, कहीं बन रही सत्ता तो कहीं जमीन खिसकती नजर आई
उत्तर और पूर्वोत्तर में मजबूती के संकेत, बंगाल में कांटे की टक्कर, दक्षिण में अब भी बड़ा संघर्ष

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद सामने आए एग्जिट पोल ने सियासी माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है। आंकड़ों में ऐसी तस्वीर उभरकर सामने आई है, जिसने जहां एक ओर सत्ताधारी दल की उम्मीदें बढ़ाई हैं, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों में बेचैनी भी साफ दिखाई दे रही है।
एग्जिट पोल के मुताबिक, असम से सबसे बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। यहां पार्टी बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की ओर बढ़ती दिख रही है। अनुमान बताते हैं कि पार्टी को 87 से 99 सीटें मिल सकती हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पकड़ अभी भी राज्य में मजबूत बनी हुई है, और विपक्ष के आरोपों का खास असर जनता पर नहीं पड़ा।
वहीं, पश्चिम बंगाल में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा नजर आ रहा है। एग्जिट पोल के अनुसार, Bharatiya Janata Party को 143 से 165 सीटें मिल सकती हैं, जबकि All India Trinamool Congress 122 से 141 सीटों के बीच सिमट सकती है। हालांकि अंतर ज्यादा नहीं है, जिससे यह साफ है कि अंतिम नतीजे आने तक सस्पेंस बना रहेगा।
दक्षिण भारत की बात करें तो यहां तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। केरल में पार्टी की स्थिति बेहद कमजोर बताई जा रही है। ज्यादातर एग्जिट पोल यह संकेत दे रहे हैं कि यहां पार्टी को अपना खाता खोलने में भी मुश्किल हो सकती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य में अभी भी मजबूत आधार बनाने की चुनौती बरकरार है।
तमिलनाडु में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यहां पार्टी को अभी एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में नहीं देखा जा रहा है। कई एग्जिट पोल में उसे अन्य श्रेणी में रखा गया है, जो राज्य की राजनीति में उसकी सीमित भूमिका को दर्शाता है।
हालांकि, पुडुचेरी से कुछ राहत भरी खबर जरूर सामने आई है। यहां पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में दिख रहा है और उसे करीब 17 सीटें मिलने का अनुमान है। यह नतीजा दक्षिण भारत में पार्टी के लिए थोड़ी राहत जरूर दे सकता है।
कुल मिलाकर एग्जिट पोल की तस्वीर साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटी नजर आती है। उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में पकड़ मजबूत होती जा रही है, जबकि पश्चिम बंगाल में कड़ा मुकाबला जारी है। वहीं दक्षिण भारत अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जहां राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए लंबा संघर्ष बाकी है।









