₹10,000 की SIP या ₹2 लाख का लमसम… कौन पहले बनाएगा ₹1 करोड़? कैलकुलेशन देखकर चौंक जाएंगे!

एक रास्ते में हर महीने छोटा निवेश, दूसरे में एकमुश्त रकम... जानिए किस विकल्प से करोड़पति बनने का सपना जल्दी हो सकता है पूरा।

नई दिल्ली। अगर आपका सपना आने वाले वर्षों में ₹1 करोड़ का फंड तैयार करने का है, तो म्यूचुअल फंड आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि हर महीने SIP करें या एकमुश्त (Lumpsum) निवेश? दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन कौन सा तरीका आपके लक्ष्य तक जल्दी पहुंचा सकता है? आइए आसान कैलकुलेशन से समझते हैं।

SIP और Lumpsum में क्या अंतर है?

अगर आपके पास बड़ी रकम एक साथ उपलब्ध नहीं है, तो SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए हर महीने छोटी-छोटी राशि निवेश की जा सकती है। वहीं, यदि आपके पास पहले से बड़ी रकम है, तो Lumpsum Investment में पूरा पैसा एक साथ निवेश किया जाता है, जिससे पूरी राशि पर पहले दिन से ही संभावित रिटर्न मिलना शुरू हो जाता है।

₹2 लाख का Lumpsum कब बनेगा ₹1 करोड़?

  • एकमुश्त निवेश: ₹2,00,000
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • निवेश अवधि: 35 साल
  • अनुमानित फंड वैल्यू: ₹1,05,59,924

यानी अगर आप आज ₹2 लाख निवेश कर देते हैं और औसतन 12% वार्षिक रिटर्न मिलता है, तो करीब 35 साल बाद आपका फंड ₹1 करोड़ से अधिक हो सकता है।

₹10,000 की SIP कब बनाएगी ₹1 करोड़?

  • मासिक SIP: ₹10,000
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • निवेश अवधि: 21 साल
  • कुल निवेश: ₹25,20,000
  • अनुमानित फंड वैल्यू: ₹1,04,30,067

यानी हर महीने ₹10,000 की SIP करने पर लगभग 21 साल में ₹1 करोड़ से अधिक का फंड तैयार हो सकता है। यदि आप Step-Up SIP (हर साल SIP राशि बढ़ाना) अपनाते हैं, तो यह लक्ष्य इससे भी पहले हासिल किया जा सकता है।

आपके लिए कौन-सा विकल्प बेहतर है?

अगर आपकी नियमित आय है और आप हर महीने अनुशासित तरीके से निवेश कर सकते हैं, तो SIP बेहतर विकल्प माना जाता है। वहीं, यदि आपके पास बोनस, विरासत या संपत्ति बेचने जैसी वजह से बड़ी रकम उपलब्ध है और आप उसे लंबे समय तक निवेशित रख सकते हैं, तो Lumpsum Investment बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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