फसल खराब होने पर यहाँ सरकार दे रही है ₹22,500 तक का मुआवजा, जानें किसे और कैसे मिलेगा लाभ
The government is offering compensation of up to ₹22,500 for crop damage here; find out who is eligible and how to avail the benefit.

अमूमन खेती को ‘मानसून का जुआ’ कहा जाता है, क्योंकि ज्यादातर किसानों की किस्मत पूरी तरह मौसम के मिजाज पर निर्भर करती है। हर साल लाखों किसान खरीफ और रबी सीजन में खून-पसीना बहाकर फसल बोते हैं, लेकिन कभी सूखा, कभी भारी बारिश (अतिवृष्टि), तो कभी ओलावृष्टि और पाला उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर देते हैं। अचानक बदलते मौसम के कारण फसलें पूरी तरह तबाह हो जाती हैं और किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
किसानों की इसी लाचारी और नुकसान को देखते हुए राजस्थान सरकार एक बेहद मददगार योजना चला रही है, जिसका नाम है ‘कृषि आदान अनुदान सहायता योजना’। इस योजना के तहत मौसम की मार झेलने वाले किसानों को दोबारा पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकार ₹22,500 प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक सहायता (मुआवजा) दे रही है।
किन किसानों को मिलेगा मुआवजा?
इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने एक मुख्य शर्त तय की है:
33% या अधिक नुकसान: योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी खड़ी फसल प्राकृतिक आपदा (बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, शीत लहर, चक्रवात या कीड़ों के प्रकोप) के कारण कम से कम 33 प्रतिशत या उससे ज्यादा खराब हुई हो।
गिरदावरी रिपोर्ट: नुकसान का आकलन राजस्व विभाग द्वारा की जाने वाली गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। सर्वे में नुकसान की पुष्टि होने के बाद ही पात्र किसानों के बैंक खातों में सहायता राशि भेजी जाती है।
अलग से आवेदन करने की झंझट नहीं!
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पीड़ित किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने या अलग से आवेदन करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
प्रभावित किसानों और उनकी फसलों का डेटा संबंधित पटवारी द्वारा सीधे डीएमआईए (DMIA) पोर्टल पर दर्ज किया जाता है।
सरकार ने इसके लिए समयसीमा भी तय की है— खरीफ फसलों का डेटा 31 मार्च तक और रबी फसलों का डेटा 30 सितंबर तक पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता है।
अगर सर्वे न हो तो क्या करें?
यदि आपकी फसल खराब हुई है और पटवारी ने सर्वे नहीं किया है, तो आप खुद ‘राज गिरदावरी ऐप’ (Raj Girdawari App) के जरिए अपने नुकसान की सूचना सरकार को भेज सकते हैं। इसके अलावा आप अपने क्षेत्र के पटवारी, तहसीलदार या जिला कलेक्टर को लिखित जानकारी देकर सर्वे की मांग कर सकते हैं।
फसल के हिसाब से तय है सहायता राशि (अधिकतम 2 हेक्टेयर)
राज्य सरकार द्वारा यह मुआवजा एसडीआरएफ (SDRF) के मानकों के अनुसार दिया जाता है। जमीन की सिंचाई व्यवस्था और फसल के प्रकार के आधार पर मुआवजे को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
राशि (प्रति हेक्टेयर)
- वर्षा आधारित फसलें (बारानी खेती) ₹8,500
- सिंचित फसलें (सिंचाई सुविधा वाली खेती) ₹17,000
- बारहमासी फसलें (फल-बागवानी आदि) ₹22,500
ध्यान दें: यह सहायता राशि एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की भूमि के लिए ही दी जा सकती है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपदा के समय राहत राशि बिना किसी देरी के सीधे असली हकदार यानी प्रभावित किसान तक पहुंचे, ताकि वे बिना कर्ज के जाल में फंसे अगली फसल के लिए नई शुरुआत कर सकें।









