झारखंड: सरकारी दफ्तरों में जींस-टी शर्ट हुआ बैन, फार्मल ड्रेस कोड हुआ लागू, कर्मचारियों की ड्यूटी टाइमिंग को लेकर भी ये सख्त निर्देश
Jharkhand: Jeans and T-shirts banned in government offices, formal dress code implemented, strict instructions regarding employees' duty timings.

लातेहार। सरकारी दफ्तरों की कार्यसंस्कृति सुधारने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। उपायुक्त संदीप कुमार ने सभी सरकारी कार्यालयों में ड्रेस कोड और अनुशासन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को जींस, टी-शर्ट या अन्य कैजुअल कपड़ों में कार्यालय आने की अनुमति नहीं होगी। सभी कर्मचारियों को फॉर्मल ड्रेस में ही ड्यूटी करनी होगी।
डीसी ने स्पष्ट कहा है कि सरकारी कार्यालय कोई कैजुअल जोन, फैशन स्टेज या मॉल नहीं हैं, बल्कि जनता की सेवा के केंद्र हैं। यहां अनुशासन, समयपालन और जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। आदेश के बाद जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
“दफ्तर सेवा का स्थान, लापरवाही नहीं चलेगी”
उपायुक्त संदीप कुमार ने अपने निर्देश में साफ शब्दों में कहा कि सरकारी दफ्तरों में कार्य संस्कृति को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी मनमर्जी के कपड़े पहनकर, देर से पहुंचकर या बीच में कार्यालय छोड़कर अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकते।उन्होंने कहा कि जनता अपने जरूरी कामों के लिए सरकारी दफ्तरों में आती है और उन्हें समय पर सेवाएं मिलना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में कर्मचारियों की लापरवाही और अनुशासनहीनता सीधे तौर पर आम लोगों को प्रभावित करती है।
समयपालन पर भी सख्त रुख
ड्रेस कोड के साथ-साथ उपायुक्त ने समयपालन को लेकर भी कड़ा संदेश दिया है। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचें और निर्धारित समय तक उपस्थित रहें।
डीसी ने साफ कर दिया कि देर से आने, बिना सूचना गायब रहने या तय समय से पहले दफ्तर छोड़ने जैसी आदतों को अब सामान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ती शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
जिले में लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि कई सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते और आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई कार्यालयों में अव्यवस्था, गंदगी और फाइलों के ढेर की भी शिकायतें सामने आ रही थीं।इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने पूरे सिस्टम में सुधार लाने के लिए यह सख्त कदम उठाया है।
काम की गुणवत्ता पर भी नजर
उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब केवल उपस्थिति दर्ज कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कर्मचारियों के काम की गुणवत्ता और गति का भी मूल्यांकन किया जाएगा।यदि किसी विभाग में जनता के काम अनावश्यक रूप से लंबित पाए गए, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि टालमटोल और ढिलाई की पुरानी कार्यशैली अब नहीं चलेगी।
दफ्तरों की साफ-सफाई पर विशेष जोर
प्रशासन ने कार्यालयों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने के भी निर्देश दिए हैं। गंदगी, अव्यवस्थित रिकॉर्ड और फाइलों के ढेर को अब सीधे तौर पर लापरवाही माना जाएगा।डीसी ने कहा कि सरकारी दफ्तरों का माहौल ऐसा होना चाहिए, जहां आम लोगों को सम्मानजनक और व्यवस्थित व्यवस्था महसूस हो।









