झारखंड शिक्षक भर्ती में बड़ा ट्विस्ट! 2800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, अब CID खोलेगी पूरा राज
माध्यमिक आचार्य परीक्षा में कथित कंप्यूटर हैकिंग के मामले की होगी आपराधिक जांच; हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को FIR दर्ज कर CID जांच कराने का दिया निर्देश

रांची। झारखंड माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद में अब बड़ा मोड़ आ गया है। करीब 2800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराए जाने के मामले की जांच अब झारखंड CID करेगी। झारखंड हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को आपराधिक मामला दर्ज कर CID से जांच कराने का निर्देश दिया है।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने यह आदेश अर्पणा कुमारी और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई अहम सवाल उठाए और यह जानना चाहा कि यदि परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम में बाहरी हस्तक्षेप या हैकिंग हुई थी, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई।
2800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा पर उठे सवाल
मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन संख्या 2/2025 से जुड़ा है।
JSSC ने परीक्षा में कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़ या हैकिंग की आशंका का हवाला देते हुए करीब 2800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराने का नोटिस जारी किया था। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि परीक्षा एक बार आयोजित हो चुकी है, ऐसे में केवल कुछ अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में बैठाना उचित नहीं है।
कोर्ट ने पूछा- आखिर सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों की ही दोबारा परीक्षा क्यों?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अगर परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम में बाहरी हस्तक्षेप या हैकिंग हुई थी, तो इसकी विस्तृत जांच क्यों नहीं कराई गई।
अदालत ने यह भी जानना चाहा कि केवल प्रभावित अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराने का आधार क्या था। अब CID जांच के जरिए पूरे मामले की परिस्थितियों और परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ी की जांच की जाएगी।
पहली परीक्षा के अंक भी होंगे सार्वजनिक
हाईकोर्ट ने JSSC को एक और अहम निर्देश दिया है। आयोग को उन अभ्यर्थियों की पहले आयोजित परीक्षा के अंक भी प्रकाशित करने होंगे, जिनकी दोबारा परीक्षा कराई गई है।
अदालत ने कहा कि यदि CID जांच में इन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आता है और वे निर्धारित मेरिट में आते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर भी विचार किया जा सकता है।
पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ सकता है जांच का असर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CID जांच में सामने आने वाले तथ्यों का असर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया और परीक्षा परिणाम पर पड़ सकता है। यानी जांच में अगर परीक्षा से जुड़ी कोई गंभीर अनियमितता सामने आती है तो उसका प्रभाव केवल 2800 अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहेगा।
वहीं, यदि जांच के दौरान JSSC के किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है और उसे दोषी पाया जाता है, तो आयोग संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करेगा।
अब CID की जांच पर टिकी नजरें
माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति परीक्षा को लेकर पहले से ही अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच CID के हाथों में जाने से पूरी प्रक्रिया पर निगाहें टिक गई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि परीक्षा के दौरान वास्तव में कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़ हुई थी या नहीं, और अगर हुई थी तो इसके पीछे कौन था? CID की जांच से इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।









