झारखंड: कर्मचारी-अधिकारी ने फूंका आंदोलन का बिगुल, 21 दिसंबर को राजधानी में करेंगे शक्ति प्रदर्शन, जानिये क्या है मांगें

Jharkhand: Employees and officers have launched a protest, will demonstrate their strength in the capital on December 21st. Find out their demands.

रांची। झारखंड में कर्मचारी आंदोलन पर उतारू हो गये हैं। 21 दिसंबर को कर्मचारियों की गोलबंदी राजधानी की सड़कों पर दिखेगी। ओबीसी आरक्षण को लेकर कर्मचारियों में असंतोष गहराया है। झारखंड के विभिन्न विभागों में कार्यरत ओबीसी अधिकारी-कर्मचारी अब संगठित होकर आंदोलन के रास्ते पर उतरने की तैयारी में हैं। 21 दिसंबर को रांची के नामकुम में सामाजिक न्याय एवं ओबीसी अधिकार सम्मेलन आयोजित कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

 

21 दिसंबर को रांची के नामकुम स्थित डिप्लोमा अभियंता संघ भवन में राष्ट्रीय ओबीसी अधिकारी कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले सामाजिक न्याय एवं ओबीसी अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन के जरिए ओबीसी समाज राज्य सरकार पर आरक्षण और अधिकारों को लेकर ठोस निर्णय लेने का दबाव बनाएगा।

 

कई दिग्गज नेताओं की होगी मौजूदगी

राज्य सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई प्रमुख चेहरे शामिल होंगे। कार्यक्रम में झारखंड सरकार के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जानकी यादव, बीजेपी विधायक दल के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी महेंद्र मोदी की उपस्थिति प्रस्तावित है। इनके साथ-साथ राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत ओबीसी अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में सम्मेलन में भाग लेंगे ।

 

ओबीसी आरक्षण को लेकर 12 सूत्री मांगें

राष्ट्रीय ओबीसी अधिकारी कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन के बाद 12 सूत्री मांगों का एक ज्ञापन सरकार को सौंपा जाएगा। इन मांगों में सबसे प्रमुख मुद्दा ओबीसी को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने का है।उन्होंने कहा कि जिस तरह एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग को स्पष्ट आरक्षण का लाभ मिलता है, उसी तरह ओबीसी समाज को भी समान अधिकार मिलना चाहिए। सम्मेलन में ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी’ के नारे के साथ सरकार से न्याय की मांग की जाएगी।

 

सात जिलों में ओबीसी आरक्षण शून्य पर नाराजगी

राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि खूंटी सहित झारखंड के सात जिलों में ओबीसी आरक्षण शून्य हो चुका है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। इसे लेकर ओबीसी समाज में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में ओबीसी की भागीदारी लगातार कम होती जा रही है, जिससे सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है।

 

प्रोन्नति में आरक्षण की भी मांग

सम्मेलन में केवल नियुक्ति ही नहीं, बल्कि सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति (Promotion) में आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। ओबीसी मोर्चा का कहना है कि जब अन्य वर्गों को प्रोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलता है, तो ओबीसी को इससे वंचित रखना संविधान की भावना के खिलाफ है।

ashrita

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