रसोई गैस की किल्लत से मिलेगा छुटकारा, लगाएं बायोगैस प्लांट; सरकार दे रही है 50% तक सब्सिडी

Say goodbye to cooking gas shortages—install a biogas plant; the government is offering a subsidy of up to 50%.

पटना: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम आदमी की रसोई तक पहुंचने लगा है। पिछले कुछ समय से देश में एलपीजी (LPG) गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है, वहीं लगातार बढ़ते दामों ने आम उपभोक्ताओं का बजट बिगाड़ दिया है। ऐसे संकट के समय में लोग अब एलपीजी के अन्य विकल्पों की ओर रुख करने को मजबूर हैं।

​अगर आपके घर के पीछे या आसपास कुछ खाली जमीन पड़ी है, तो यह संकट आपके लिए एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकता है। आप अपने घर पर खुद का बायोगैस प्लांट (Biogas Plant) लगाकर न सिर्फ महंगे एलपीजी सिलेंडर से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि हर महीने मोटी बचत भी कर सकते हैं।

​सरकार दे रही है ₹22,500 तक की बंपर सब्सिडी

​बायोगैस को बढ़ावा देने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए बिहार सरकार ने एक बेहद शानदार योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सरकार बायोगैस प्लांट लगाने की लागत का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है:

  • कुल लागत और छूट: यदि आप अपने घर या खेत पर 2 घन मीटर (2 Cubic Meter) की क्षमता वाला एक छोटा बायोगैस प्लांट लगाते हैं, तो इसकी कुल लागत लगभग ₹42,000 आती है।
  • 50% की सीधी सब्सिडी: सरकार इस कुल लागत का सीधा 50 फीसदी हिस्सा (यानी ₹21,000) सब्सिडी के रूप में सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर (DBT) कर देती है।
  • अतिरिक्त वित्तीय सहायता: इसके अलावा, सरकार प्लांट लगाने वाले को ₹1,500 की अतिरिक्त आर्थिक मदद भी अलग से दे रही है।
  • कुल फायदा: इन दोनों को मिलाकर एक किसान या ग्रामीण को प्रति बायोगैस प्लांट कुल ₹22,500 का सरकारी अनुदान मिल जाता है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना के तहत एक भारी-भरकम बजट भी पास किया है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण इस क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) का लाभ उठा सकें।

​हर महीने मिलेगी 2 सिलेंडर जितनी गैस

​इस घरेलू बायोगैस प्लांट को चालू रखने के लिए आपको किसी महंगे ईंधन की जरूरत नहीं है। इसमें सिर्फ थोड़े से गोबर और पानी की आवश्यकता होती है। रोजाना इसमें गोबर डालने से जो मीथेन गैस बनती है, उससे आपके किचन का चूल्हा बिना किसी रुकावट के लगातार जल सकता है।
​विशेषज्ञों के मुताबिक, इस छोटे से 2 घन मीटर के प्लांट से हर महीने इतनी गैस आसानी से जनरेट हो जाती है, जो आम रसोई में इस्तेमाल होने वाले दो घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के बराबर का बैकअप दे देती है।

​पर्यावरण की सुरक्षा के साथ कमाई का भी जरिया

​बायोगैस प्लांट न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि अब यह ग्रामीण इलाकों और किसानों के लिए कमाई का जरिया भी बन रहा है। गैस बनने के बाद जो अपशिष्ट (Slurry) बचता है, वह खेतों के लिए एक बेहतरीन और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (Organic Fertilizer) का काम करता है। इससे किसान अपनी फसलों की पैदावार बढ़ा सकते हैं और बाजार में इस जैविक खाद को बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।

​अगर आप भी महंगे सिलेंडर और गैस की किल्लत से परेशान हैं, तो सरकार की इस योजना का लाभ उठाकर आज ही अपने घर के पीछे बायोगैस प्लांट लगाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

Chauhan

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