लखनऊ समिट में यूपी को मिला निवेश का बड़ा बूस्ट, 15 कंपनियों से करार और 13 संस्थानों से साझेदारी, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्नोलॉजी और कारोबारी सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी तेज, पांच निवेशकों को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी, एआई और कौशल विकास पर भी हुआ मंथन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को वैश्विक क्षमता केंद्रों यानी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 में निवेश आकर्षित करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक तैयार करने के लिए कई अहम पहल की गईं। सम्मेलन के दौरान कंपनियों और प्रतिभा विकास से जुड़े भागीदारों के साथ 15 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा पांच निवेशकों को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी किए गए और 13 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ।
इन साझेदारियों से प्रदेश में नई तकनीकी परियोजनाओं को बढ़ावा मिलने, मौजूदा कारोबारी केंद्रों का विस्तार होने और उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक कारोबारी सेवाओं में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
पांच निवेशकों को जारी किए गए लेटर ऑफ कंफर्ट
समिट में हवेल्स इंडिया लिमिटेड, एमेरिप्राइज इंडिया एलएलपी, मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशन्स सपोर्ट सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डब्ल्यूएसपी कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी किए गए। यह पहल प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को मजबूत करने और कंपनियों को अपनी परियोजनाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।
हालांकि, डब्ल्यूएसपी कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री की मंजूरी और औपचारिक पत्र जारी होने की प्रक्रिया अभी बाकी है। ऐसे में इस कंपनी से जुड़ी प्रक्रिया को पूरी तरह संपन्न नहीं माना जा सकता।
15 समझौतों से जीसीसी क्षेत्र के विस्तार की तैयारी
सम्मेलन में ईवाई जीडीएस, एएमएल राइटसोर्स, कंप्यूटासेंटर, मेटलाइफ, डीएसवी, डैमैक, अल्ट्रुआइस्ट और स्मार्टवर्क्स जैसी कंपनियों के साथ समझौते किए गए। इनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स स्थापित करना और पहले से चल रहे परिचालन का विस्तार करना है।
स्मार्टवर्क्स लखनऊ में दो समर्पित परिसर स्थापित कर रहा है। इससे शहर में आधुनिक कारोबारी सुविधाओं और तकनीकी सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। जीसीसी के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनियां तकनीकी विकास, इंजीनियरिंग, डेटा विश्लेषण, अनुसंधान और अन्य महत्वपूर्ण कारोबारी सेवाओं का संचालन करती हैं। इस क्षेत्र के विस्तार से प्रदेश में अधिक विशेषज्ञता वाले काम और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
पेटीएम, अमेजन वेब सर्विसेज और आईबीएम भी कौशल विकास में करेंगे सहयोग
जीसीसी क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए प्रतिभा विकास और प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया। पेटीएम, अमेजन वेब सर्विसेज, बार्कलेज, आईबीएम और नौकरी ने प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों में सहयोग के लिए साझेदारी की है। पेटीएम ने इस पहल के तहत दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
इन साझेदारियों का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी और कारोबारी क्षेत्रों में जरूरी कौशल उपलब्ध कराना है, ताकि वे कंपनियों की बदलती जरूरतों के अनुरूप काम करने के लिए तैयार हो सकें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और आधुनिक कारोबारी सेवाओं के विस्तार के बीच उद्योगों को प्रशिक्षित प्रतिभाओं की जरूरत है। ऐसे में कंपनियों और प्रशिक्षण भागीदारों के बीच सहयोग को रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
13 शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी, छात्रों को मिलेगा उद्योग से जुड़ने का मौका
समिट में 13 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, आईआईटी रुड़की, भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ, आईआईटी बीएचयू वाराणसी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, शिव नादर विश्वविद्यालय, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान प्रयागराज, लखनऊ विश्वविद्यालय, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान प्रयागराज, ट्रिपल आईटी लखनऊ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय शामिल हैं।
इन संस्थानों के साथ साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इसके जरिए विद्यार्थियों को उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तैयार करने, व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने और अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इससे शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध प्रतिभा को रोजगार और तकनीकी विकास से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
सात सत्रों में एआई और भविष्य की तकनीक पर चर्चा
समिट के दौरान सात विषयगत सत्र आयोजित किए गए। इनमें जीसीसी स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थान का चयन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संचालन, उत्पाद केंद्रित नवाचार, स्टार्टअप के साथ सहयोग, विश्वविद्यालयों की भूमिका और भविष्य में जरूरी कौशल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने बताया कि वैश्विक कंपनियों की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत में प्रतिभा विकास, उत्पाद निर्माण और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। एआई और डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होगी, जो नई तकनीकों के साथ काम कर सकें और वैश्विक स्तर की सेवाएं देने में सक्षम हों।
उत्तर प्रदेश को वैश्विक कारोबारी केंद्र बनाने की कोशिश
आईआईटी कानपुर एलुमनाई एसोसिएशन ने इन्वेस्ट यूपी और एचसीएल टेक के सहयोग से होटल द सेंट्रम में इस सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, निवेशकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
समिट में हुए समझौते और साझेदारियां उत्तर प्रदेश को वैश्विक क्षमता केंद्रों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं। अब इन पहलों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित निवेश कितनी तेजी से परियोजनाओं में बदलते हैं, नए केंद्र कब तक शुरू होते हैं और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को कितने रोजगार के अवसर मिलते हैं।









