PNB ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, 10 नवंबर के बाद बंद हो सकते हैं कुछ बैंक खाते, जानिए किन लोगों को तुरंत करना होगा ये काम

पंजाब नेशनल बैंक ने तीन साल से अधिक समय से निष्क्रिय और जीरो बैलेंस वाले खातों को लेकर जारी किया अलर्ट, खाता चालू रखने के लिए समय सीमा से पहले पूरी करनी होगी KYC प्रक्रिया

नई दिल्ली। अगर आपका पंजाब नेशनल बैंक यानी PNB में खाता है और आप लंबे समय से उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। बैंक ने कुछ ऐसे खातों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है, जिनमें लंबे समय से ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन नहीं हुआ है और खाते में बैलेंस भी शून्य है। ऐसे खाताधारकों को 10 नवंबर 2026 तक जरूरी प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।

बैंक के नोटिस के मुताबिक, यह कदम ऐसे खातों के संभावित दुरुपयोग को रोकने और उनसे जुड़े जोखिम कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पीएनबी के सभी निष्क्रिय खाते बंद कर दिए जाएंगे। यह कार्रवाई केवल तय शर्तों के दायरे में आने वाले खातों पर लागू होती है।

किन बैंक खातों पर होगी कार्रवाई?

पीएनबी के अलर्ट के अनुसार, ऐसे खाते इस प्रक्रिया के दायरे में आ सकते हैं, जिनमें 30 सितंबर 2026 तक लगातार तीन साल से अधिक समय से ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन या गतिविधि नहीं हुई है। इसके साथ ही खाते में बैलेंस भी शून्य होना जरूरी है।

यानी खाते पर कार्रवाई के लिए दोनों शर्तें महत्वपूर्ण हैं। पहली, तीन साल से अधिक समय तक ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन नहीं हुआ हो और दूसरी, खाते में कोई राशि जमा न हो। अगर आपका खाता लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है, लेकिन उसमें पैसे जमा हैं, तो यह मानकर न चलें कि वह इसी नोटिस के तहत बंद हो जाएगा। अपने खाते की स्थिति बैंक से जरूर पता करें।

10 नवंबर से पहले क्या करना होगा?

अगर आपका खाता इन शर्तों के दायरे में आता है और आप उसे चालू रखना चाहते हैं, तो 10 नवंबर 2026 से पहले अपनी संबंधित पीएनबी शाखा में संपर्क करें। बैंक की ओर से मांगे गए KYC दस्तावेज जमा करें और खाते को दोबारा सक्रिय रखने या चालू कराने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करें।

खाताधारकों से पहचान और पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार पैन कार्ड या फॉर्म 60 भी देना पड़ सकता है। दस्तावेजों की जांच और बैंक की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही खाते को दोबारा सक्रिय करने की कार्रवाई की जाएगी।

ब्रांच जाने से पहले बैंक से यह पता कर लेना बेहतर होगा कि आपके खाते के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं। आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते प्रक्रिया पूरी करने से परेशानी से बचा जा सकता है।

निष्क्रिय और इनऑपरेटिव खाते में क्या है अंतर?

बैंकिंग नियमों के तहत बचत या चालू खाते में लगातार 24 महीने तक ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन नहीं होने पर उसे इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय खाते की श्रेणी में रखा जा सकता है। वहीं, पीएनबी के मौजूदा नोटिस में कुछ खातों को बंद करने की कार्रवाई के लिए तीन साल से अधिक समय तक कोई ग्राहक गतिविधि नहीं होने और जीरो बैलेंस की शर्त रखी गई है।

इसलिए हर निष्क्रिय खाते को बंद किए जाने वाला खाता समझना सही नहीं होगा। अगर आपका खाता लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो भी उसकी मौजूदा स्थिति और KYC की जरूरतों के बारे में बैंक से जानकारी लेना जरूरी है।

मदद के लिए इन नंबरों पर कर सकते हैं संपर्क

अगर आपको अपने खाते की स्थिति, KYC या उसे दोबारा सक्रिय कराने की प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल है, तो नजदीकी पीएनबी शाखा में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा बैंक के टोल-फ्री नंबर 1800-1800 और 1800-2021 पर भी जानकारी ली जा सकती है।

किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर भरोसा करके अपना OTP, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। खाते को चालू रखने के नाम पर आए किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के बजाय सीधे बैंक की शाखा या सत्यापित ग्राहक सेवा माध्यम से जानकारी लें।

किन ग्राहकों को अभी ध्यान देने की जरूरत है?

जिन खाताधारकों ने तीन साल से अधिक समय से अपने खाते में कोई लेनदेन नहीं किया है और जिनका बैलेंस शून्य है, उन्हें सबसे पहले अपने खाते की स्थिति जांचनी चाहिए। अगर खाता इस नोटिस के दायरे में आता है, तो 10 नवंबर 2026 से पहले KYC और जरूरी प्रक्रिया पूरी करें।

ध्यान रखें कि पीएनबी का यह अलर्ट सभी ग्राहकों के खाते बंद करने के बारे में नहीं है। सही जानकारी के लिए बैंक से अपने खाते की स्थिति की पुष्टि करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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