Private Bank Jobs: बैंकों में 13000 नौकरियां घट गयी, इन 4 बड़े बैंकों ने ब्रांच तो बढ़ाये, लेकिन कम हो गयी नौकरियां? जानिये क्या है इसकी वजह

Private Bank Jobs पर बड़ा बदलाव सामने आया है। ICICI, HDFC, Axis और Kotak में करीब 13 हजार कर्मचारी घटे। जानें ब्रांच बढ़ने के बावजूद बैंकिंग नौकरियां क्यों कम हुईं।

Bank Job। आज देश के लाखों युवा बैंकिंग सेक्टर में जाना चाहते हैं। बैंक से जुड़कर काम करना चाहते हैं, लेकिन ये खबर उन युवाओं के दिल को छोटा कर सकता है, जो बैंकिंग सेक्टर में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। एक आंकड़े बताते हैं कि देश के चार बड़े प्राइवेट बैंकों में कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कमी आई है।

ICICI Bank, HDFC Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में कुल मिलाकर करीब 13 हजार कर्मचारियों की संख्या घटाई है। खास बात यह है कि इसी दौरान इन बैंकों ने देशभर में सैकड़ों नई शाखाएं भी खोलीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बैंक अपना नेटवर्क बढ़ा रहे हैं तो फिर कर्मचारियों की संख्या क्यों कम हो रही है?

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सबसे बड़ी कमी ICICI Bank में देखने को मिली। बैंक के स्थायी कर्मचारियों की संख्या 31 मार्च 2025 के 1,29,177 से घटकर 31 मार्च 2026 को 1,24,029 रह गई। यानी स्थायी कर्मचारियों की संख्या में 5,148 की कमी आई। स्थायी कर्मचारियों के अलावा अन्य स्टाफ को मिलाकर बैंक की कुल वर्कफोर्स में करीब 6,633 की कमी दर्ज की गई।

वहीं HDFC Bank के कर्मचारियों की संख्या 3,343 घटकर 2,11,178 हो गई। Axis Bank की वर्कफोर्स करीब 3,100 घटकर 1,01,300 रह गई, जबकि Kotak Mahindra Bank में कर्मचारियों की संख्या 1,269 कम होकर 74,054 हो गई।

ब्रांच बढ़ीं, फिर भी कर्मचारियों की संख्या क्यों घटी?

बैंकों के आंकड़े एक दिलचस्प बदलाव की ओर इशारा करते हैं। एक तरफ बैंक अपनी फिजिकल मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई पारंपरिक बैंकिंग कार्यों के लिए कर्मचारियों की जरूरत कम हो रही है।ICICI Bank ने FY26 में 528 नई शाखाएं जोड़ीं और उसका ब्रांच नेटवर्क बढ़कर 7,511 हो गया। HDFC Bank ने 234 नई शाखाएं खोलीं और उसके पास कुल 9,689 शाखाएं हो गईं। Axis Bank ने भी करीब 400 स्थानों पर अपना ब्रांच नेटवर्क बढ़ाया, जबकि Kotak Mahindra Bank ने 128 नई शाखाएं जोड़ीं।इसका मतलब यह है कि अब बैंक की नई शाखा पहले की तरह बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर निर्भर नहीं है।

डिजिटल बैंकिंग ने बदला काम करने का तरीका

मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, UPI, ATM और सेल्फ-सर्विस चैनलों के बढ़ते इस्तेमाल ने बैंकिंग के कई पुराने कामों को बदल दिया है। पहले दस्तावेजों की जांच, जानकारी का सत्यापन, ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग, अकाउंट सर्विस और कई अन्य कामों के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती थी।

अब इन कामों का बड़ा हिस्सा डिजिटल सिस्टम और केंद्रीकृत प्रक्रियाओं के जरिए किया जा सकता है। इससे बैंक कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने में सक्षम हो रहे हैं।नई शाखाएं अब मुख्य रूप से ग्राहक जोड़ने, लोन, डिपॉजिट, वेल्थ मैनेजमेंट, SME बिजनेस और वित्तीय उत्पादों की बिक्री पर अधिक ध्यान दे रही हैं।

क्या 13 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। कर्मचारियों की संख्या में 13 हजार की कमी को सीधे तौर पर 13 हजार लोगों की छंटनी नहीं माना जा सकता।बैंकिंग सेक्टर में हर साल बड़ी संख्या में कर्मचारी नौकरी छोड़ते हैं। इसे सामान्य तौर पर attrition कहा जाता है। यदि बैंक नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की जगह उतनी संख्या में नई भर्ती नहीं करते हैं, तो कुल कर्मचारी संख्या अपने आप कम हो जाती है।यानी उपलब्ध आंकड़े यह साबित नहीं करते कि चारों बैंकों ने मिलकर 13 हजार कर्मचारियों को सीधे नौकरी से निकाल दिया।

भर्ती पूरी तरह बंद नहीं हुई है

कर्मचारियों की कुल संख्या घटने का मतलब यह भी नहीं है कि बैंकों ने भर्ती बंद कर दी है। इसका उदाहरण Kotak Mahindra Bank के आंकड़ों से मिलता है। बैंक ने FY26 में 28,846 कर्मचारियों की भर्ती की, इसके बावजूद उसकी कुल वर्कफोर्स में 1,269 की कमी आई।इससे संकेत मिलता है कि बैंक एक तरफ नई जरूरत के हिसाब से भर्ती कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ कुछ भूमिकाओं में कर्मचारियों की संख्या कम कर रहे हैं।

AI और Automation भी बन रहे हैं बदलाव की वजह

बैंकिंग सेक्टर में Artificial Intelligence (AI), Automation और Digital Technology का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक FY26 में कर्मचारियों की संख्या में आई पूरी कमी के लिए सिर्फ AI को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

ऑटोमेशन का सबसे ज्यादा असर फिलहाल दोहराए जाने वाले और बैक-ऑफिस कामों पर दिखाई देता है। दस्तावेजों की प्रोसेसिंग, डेटा एंट्री, ग्राहक अनुरोधों का निपटारा और कुछ नियमित बैंकिंग प्रक्रियाएं तकनीक के जरिए तेजी से की जा सकती हैं।इसके साथ ही बैंक लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और कर्मचारियों को ज्यादा महत्वपूर्ण ग्राहक-केंद्रित भूमिकाओं में लगाने पर भी जोर दे रहे हैं।

बैंक अब किस तरह के कर्मचारियों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं?

बैंकिंग सेक्टर में रोजगार का स्वरूप बदल रहा है। पारंपरिक ऑपरेशनल कर्मचारियों की तुलना में अब बैंकों को Relationship Manager, Sales Staff, Wealth Adviser, SME Specialist और Customer-facing Professionals की ज्यादा जरूरत है।

नई ब्रांच को चलाने के लिए बड़ी बैक-ऑफिस टीम रखने की बजाय बैंक केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे एक छोटी टीम भी पहले की तुलना में ज्यादा ग्राहकों और ज्यादा लेनदेन को संभाल सकती है।

HDFC Bank के आंकड़ों में भी इसका संकेत मिलता है। FY26 में बैंक की कुल कर्मचारी संख्या कम हुई, लेकिन उसके प्रबंधकीय स्तर के कर्मचारियों की संख्या बढ़ी। इससे पता चलता है कि बैंक केवल कर्मचारियों की संख्या कम करने के बजाय वर्कफोर्स के ढांचे को भी बदल रहे हैं।

छोटे शहरों में ब्रांच खोलना अभी भी जरूरी

डिजिटल बैंकिंग के बढ़ने के बावजूद बैंक नई शाखाएं खोल रहे हैं। इसकी बड़ी वजह छोटे शहरों और कस्बों में नए ग्राहकों तक पहुंच बनाना है।लोन, जमा, बीमा, निवेश, वेल्थ मैनेजमेंट और SME कारोबार के लिए आज भी ग्राहक कई मामलों में बैंक की फिजिकल शाखा पर भरोसा करते हैं। इसलिए बैंक ब्रांच नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं, लेकिन इन शाखाओं को पुराने मॉडल की तुलना में कम ऑपरेशनल स्टाफ के साथ चलाने की कोशिश की जा रही है।

आगे कैसी होगी बैंकिंग सेक्टर में नौकरियां?

बैंकिंग सेक्टर में रोजगार खत्म होने की बजाय उसके स्वरूप में बदलाव आने की संभावना है। आने वाले समय में डिजिटल तकनीक, AI और ऑटोमेशन के कारण नियमित और दोहराए जाने वाले कामों में अवसर कम हो सकते हैं, लेकिन सेल्स, रिलेशनशिप मैनेजमेंट, डिजिटल बैंकिंग, डेटा, साइबर सिक्योरिटी, वेल्थ मैनेजमेंट और विशेषज्ञ सेवाओं में मांग बनी रह सकती है। कुल मिलाकर, FY26 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि प्राइवेट बैंक अब Headcount-led Expansion की जगह Productivity-led Growth पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यानी बैंक शाखाएं तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन हर नई शाखा के साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती करना अब जरूरी नहीं समझा जा रहा है।Private Bank Jobs: 4 बड़े बैंकों में 13 हजार कर्मचारी घटे, ब्रांच बढ़ने के बावजूद क्यों कम हुई नौकरियां?

 

 

Tags

 

Ranking के लिए नए Search Angles

1. Long-tail Keyword:
प्राइवेट बैंकों में कर्मचारियों की संख्या क्यों घट रही है

ashrita

It is one of the rapidly emerging news websites of the country. HPBL has proved its name (Har Pal Breaking Live) meaningful every time. HPBL, which has become a trusted brand of Bihar-Jharkhand, check every news of HPBL for its reliability before delivering it to you. The reporters and desk staff of hpblnews.com news website work on a 24X7 mission mode for you, the readers.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *