थाली में छिपा खतरा! पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से क्यों बढ़ सकती हैं गंभीर बीमारियों की आशंका? जानिए पूरी वजह
स्वाद के चक्कर में रोज खाया जाने वाला पैकेज्ड फूड और ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना पोषण बिगाड़ सकता है, वजन व मेटाबॉलिक समस्याओं से लेकर कुछ कैंसर के जोखिम से भी जुड़ा पाया गया है

हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैकेज्ड फूड, इंस्टेंट स्नैक्स, फास्ट फूड और ज्यादा तेल-मसाले वाले पकवान लोगों की डाइट का हिस्सा बनते जा रहे हैं। ये चीजें स्वाद में भले ही अच्छी लगें, लेकिन इनका बार-बार और ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि कोई एक खाद्य पदार्थ सीधे कैंसर का कारण बनता है। कैंसर का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है। लेकिन लंबे समय तक खराब खानपान, अधिक कैलोरी और कम पोषण वाली डाइट कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है और कुछ कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकती है।
क्या होते हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमें कई औद्योगिक प्रक्रियाओं और ऐसे घटकों का इस्तेमाल किया जाता है, जो आमतौर पर घर के सामान्य खाना पकाने में इस्तेमाल नहीं होते।
इनमें कई बार फ्री शुगर, सोडियम, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, जबकि फाइबर और कुछ जरूरी पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम हो सकते हैं।
चिप्स, कुछ पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट और कई तरह के रेडी-टू-ईट उत्पाद इसके उदाहरण हो सकते हैं।
कैंसर से कैसे जुड़ता है मामला?
वैज्ञानिक शोध में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया है। ऐसे खाद्य पदार्थों से जुड़ी खराब डाइट क्वालिटी, अधिक कैलोरी का सेवन, मोटापा और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।
कुछ शोधों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन और कुछ प्रकार के कैंसर के बीच संबंध भी पाया गया है। हालांकि, सिर्फ UPF खाने को कैंसर का सीधा कारण मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। इसके पीछे पूरी जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि, वजन, धूम्रपान, शराब, आनुवंशिक कारण और अन्य पर्यावरणीय कारक भी भूमिका निभाते हैं।
ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना भी रखें सीमित
हर मसालेदार खाना या तेल में बना भोजन कैंसर पैदा करता है, ऐसा कहना सही नहीं है। समस्या तब बढ़ सकती है जब डाइट में लंबे समय तक बहुत ज्यादा तला-भुना, कैलोरी से भरपूर और पोषण की कमी वाला भोजन शामिल रहे।
ऐसी डाइट वजन बढ़ने और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है, जो आगे चलकर स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं।
थाली में क्या बढ़ाएं?
स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए रोज की डाइट में ज्यादा से ज्यादा साबुत अनाज, दालें, फलियां, सब्जियां, फल, मेवे और बीज शामिल करना बेहतर है। पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को रोजमर्रा की डाइट का मुख्य हिस्सा बनाने के बजाय सीमित मात्रा में लेना चाहिए।
साथ ही पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन, धूम्रपान से दूरी और शराब का सेवन न करना भी कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
जरूरी बात: किसी खाद्य पदार्थ को लेकर डरने के बजाय पूरी डाइट और जीवनशैली पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है। कैंसर के जोखिम को लेकर व्यक्तिगत चिंता हो या पहले से कोई बीमारी हो, तो डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लेना बेहतर है।









