जिसे पुलिस ने बताया लूटेरी दुल्हन, उसे कोर्ट परिसर से ही छोड़ने का अदालत ने दे दिया आदेश, कोर्ट से रूख से पुलिस में मच गया हड़कंप,
The court ordered the release of the bride, whom the police described as a robber, from the court premises itself. The court's stance created a stir among the police.

Court News : चर्चित ‘लुटेरी दुल्हन’ मामले में अदालत के रूख से हड़कंप मच गया। कोर्ट ने ना सिर्फ पुलिस को फटकार लगायी, बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठा दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस किसी भी तरह का विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। इसके बाद आरोपी दिव्यांशी चौधरी को कोर्ट परिसर से ही मुक्त कर दिया गया, जिससे कानपुर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी दिव्यांशी चौधरी के खिलाफ पुलिस द्वारा मांगी गई रिमांड याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पुलिस रिमांड के समर्थन में कोई भी विश्वसनीय, तथ्यात्मक या विधिसम्मत आधार प्रस्तुत नहीं कर सकी, इसलिए रिमांड देना न्यायसंगत नहीं ठहरता।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी आरोपी की स्वतंत्रता को केवल आरोपों और अनुमान के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। इस निर्णय के बाद कोर्ट ने दिव्यांशी को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया।
पुलिस प्रशासन में हलचल, अफसरों को तलब
अदालत के रुख से कानपुर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीसीपी ने तत्काल मामले के विवेचक और संबंधित अधिकारियों को उपस्थित होने के निर्देश दिए। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अफसर यह जांच कर रहे हैं कि आखिर पुलिस की तैयारी इतने संवेदनशील मामले में कैसे कमजोर पड़ गई।
प्रारंभिक समीक्षा में सामने आया कि एफआईआर में दर्ज कई गंभीर धाराओं के समर्थन में आवश्यक डॉक्यूमेंट, रिकॉर्ड और साक्ष्य रिमांड के समय प्रस्तुत ही नहीं किए गए। अदालत को यह संतुष्ट नहीं किया जा सका कि आरोपी से पूछताछ के लिए रिमांड क्यों आवश्यक है। यही वजह रही कि अदालत ने रिमांड अस्वीकृत कर दिया।
सब-इंस्पेक्टर की शिकायत से शुरू हुआ था मामला
पूरे मामले की शुरुआत ग्वालटोली थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर आदित्य की शिकायत से हुई थी। बुलंदशहर के बीबी नगर निवासी आदित्य ने नवंबर 2024 में अपनी पत्नी दिव्यांशी चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिव्यांशी एक “ठगी करने वाली दुल्हन” है, जिसने फरवरी 2024 में शादी को धोखाधड़ी का साधन बनाया।शिकायत में दावा किया गया था कि विवाह के बाद धीरे-धीरे कई बातें संदिग्ध लगने लगीं, जिससे उन्हें विश्वास हुआ कि यह विवाह किसी संगठित ठगी रैकेट का हिस्सा है। इसी आधार पर कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।
वकील की दलील—‘पुलिस रिमांड के लिए ठोस आधार नहीं दे सकी’
अदालत में दिव्यांशी की ओर से अधिवक्ता वरुण भसीन पेश हुए। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस की रिमांड याचिका न तथ्यात्मक रूप से मजबूत है, न कानूनी रूप से उचित। वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस जिस ‘मटेरियल’ का हवाला दे रही है, वह संदेह की सीमा भी पार नहीं करता।अदालत ने भी माना कि रिमांड उसी स्थिति में दी जा सकती है जब पूछताछ आवश्यक हो और उसके पीछे ठोस आधार हों—जो इस मामले में अनुपस्थित थे।
कोर्ट ने पुलिस की देर रात की प्रक्रिया पर भी नाराजगी जताई
दिव्यांशी के वकील ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने दोपहर 12 बजे के करीब गिरफ्तारी की, लेकिन रिमांड का आवेदन शाम 5:30 बजे के बाद दाखिल किया गया। पुलिस देर रात जज के निवास पर पहुंची, जबकि अदालत की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई और टिप्पणी की कि पुलिस शायद “बिना फाइल पढ़े रिमांड मिलने की उम्मीद” में रात में पहुंची थी।









