एग्जिट पोल में प्रशांत किशोर फेल, 10 एग्जिट पोल, प्रशांत किशोर की जनसुराज को किसी ने नहीं दीं 10 सीटें, नहीं चला PK का जादू!
Prashant Kishor fails in exit polls, 10 exit polls, no one gave 10 seats to Prashant Kishor's Jansuraj, PK's magic did not work!

Prashant Kishore Exit Poll : बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर को बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। लेकिन एक्जिट पोल ने प्रशांत किशोर के दावे को हवा कर दिया है। ज्यादातर सर्वेक्षणों में एनडीए गठबंधन को स्पष्ट बढ़त दिखाई गई है, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। 10 प्रमुख एग्जिट पोल में से किसी ने भी उनकी पार्टी को 10 सीटों तक नहीं दी है। वहीं, महागठबंधन का प्रदर्शन भी पिछली बार की तुलना में कमजोर नजर आ रहा है।
लगभग सभी सर्वे एजेंसियों के अनुमानों में एनडीए गठबंधन को फिर से सत्ता में वापसी करते हुए दिखाया गया है। वहीं, लंबे समय तक राजनीतिक रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी को इन सर्वेक्षणों में बेहद सीमित समर्थन मिलता दिख रहा है। चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने राज्यभर में जन संवाद यात्रा कर जनता से सीधे संपर्क साधा था। वे लगातार यह कहते रहे कि बिहार को पारंपरिक दलों से अलग एक “तीसरे विकल्प” की आवश्यकता है। लेकिन शुरुआती एग्जिट पोल संकेतों ने इस दावे को कमजोर कर दिया है।
किन एजेंसियों ने कितनी सीटें दीं?
विभिन्न एजेंसियों के अनुसार, जन सुराज पार्टी के लिए सीटों का अनुमान इस प्रकार है:
• मैट्रिज-IANS: 0-2 सीटें
• पीपल्स पल्स: 0-5 सीटें
• जेवीसी पोल: 0-1 सीट
• पीपल्स इनसाइट: 0-2 सीटें
• पी-मार्क: 1-4 सीटें
वहीं, पोल डायरी, चाणक्य स्ट्रैटेजीज, पोलस्ट्रेट, प्रजा पोल एनालिटिक्स और टीआईएफएफ रिसर्च जैसी प्रमुख एजेंसियों ने जन सुराज को शून्य सीटें दी हैं। यानी अधिकांश सर्वे के अनुसार, पार्टी का प्रभाव अभी नगण्य है।
प्रशांत किशोर के दावे और एग्जिट पोल की हकीकत
प्रशांत किशोर ने पिछले दो वर्षों में राज्यभर में जनसंपर्क किया और दावा किया था कि उनकी पार्टी जनता का असली विकल्प बनेगी। उन्होंने लगभग हर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन एग्जिट पोल के मुताबिक, पार्टी को अधिकतम चार से पांच सीटें मिलने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नए दल के लिए यह शुरुआत निराशाजनक मानी जाएगी।
एनडीए के पक्ष में क्यों है हवा?
एग्जिट पोल के रुझान बताते हैं कि मतदाताओं ने एक बार फिर एनडीए सरकार में भरोसा जताया है। राज्य में नीतीश कुमार के अनुभव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी छवि का लाभ गठबंधन को मिला है। बीजेपी-जेडीयू का संगठनात्मक नेटवर्क, महिलाओं और युवा मतदाताओं तक पहुंच, तथा सामाजिक योजनाओं का असर इस नतीजे के पीछे मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
महागठबंधन के लिए झटका
विपक्षी महागठबंधन, जिसमें आरजेडी और कांग्रेस शामिल हैं, पिछली बार की तुलना में कमजोर प्रदर्शन करता दिख रहा है। 2020 में जहां यह गठबंधन 110 सीटों तक पहुंचा था, इस बार एग्जिट पोल में इसकी सीटें 90 के आसपास सिमटने का अनुमान है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों जैसे मुद्दों पर जोर दिया, लेकिन वह वोटों में तब्दील नहीं हो पाया।
वर्तमान विधानसभा की स्थिति
वर्तमान में बिहार विधानसभा में बीजेपी के 80 विधायक, आरजेडी के 77, जेडीयू के 45, कांग्रेस के 19, सीपीआई (एमएल) के 11, हम के 4, सीपीआई (एम)** के 2, सीपीआई के 2, एआईएमआईएम के 1 और 2 निर्दलीय विधायक हैं। बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती है।


