बड़ी खबर : हेमंत सोरेन को झारखंड HC से बड़ा झटका, ED केस में राहत देने से किया इनकार, जानिये क्या है पूरा मामला, अब हेमंत क्या सुप्रीम कोर्ट…
Breaking News: Hemant Soren suffers a major setback from the Jharkhand High Court; relief denied in ED case. Find out the full story. What will Hemant do now? Will he approach the Supreme Court...?

रांची । जमीन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन से जुड़े केस को रद्द कराने की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।
इस फैसले के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समन से जुड़े केस को निरस्त करने की ये याचिका थी।
जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि इस चरण पर अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही अब यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में आगे बढ़ेगा और ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। मुख्यमंत्री की ओर से दायर याचिका में निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई थी।
दरअसल, ईडी ने जमीन घोटाला मामले में पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री को कुल आठ समन जारी किए थे, जिन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए एजेंसी ने रांची स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर निचली अदालत ने कार्रवाई शुरू की थी, जिसे मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
मुख्यमंत्री की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता दीपांकर रॉय ने बताया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मौजूदा स्टेज पर केस में दखल देना उचित नहीं होगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मुख्यमंत्री इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे या नहीं। इस संबंध में उनके अगले कानूनी कदम को लेकर स्थिति फिलहाल साफ नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई की प्रक्रिया तेज होगी। गौरतलब है कि 4 मार्च को सीजीएम कृष्ण कांत मिश्रा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 174 के तहत संज्ञान लेते हुए इस मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था। इस कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को निर्धारित की गई है।
यह भी उल्लेखनीय है कि इसी मामले में 6 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एमपी-एमएलए कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए थे। उस दौरान उन्होंने 7-7 हजार रुपये के दो बेल बॉन्ड भी भरे थे।
इसके बाद कोर्ट ने उन्हें ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत रूप से हर पेशी में उपस्थित होने से छूट दे दी थी। हालांकि, अब ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ इस मामले पर सियासी और कानूनी हलचल तेज होने की संभावना है।
ईडी का आरोप है कि जमीन घोटाले से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए जारी किए गए समन की अवहेलना करना कानून का उल्लंघन है। वहीं मुख्यमंत्री की ओर से यह तर्क दिया गया कि निचली अदालत की कार्यवाही कानूनन सही नहीं है। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस दलील को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।
इस फैसले को झारखंड की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए किसी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रायल शुरू होना एक संवेदनशील विषय है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं या एमपी-एमएलए कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी रखते हैं।







