Cancer Risk Diet: रोज की थाली में छिपा है कैंसर का खतरा? ज्यादा नमक, मीट और तला खाना बढ़ा सकता है जोखिम, जानें बचाव की सही डाइट

Cancer Risk Diet: कैंसर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। यह एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसके खतरे को कम करने में हमारी लाइफस्टाइल और खानपान की भी अहम भूमिका हो सकती है। परिवार में कैंसर का इतिहास होने जैसे कुछ जोखिम कारकों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन हम रोज क्या खाते हैं और किस तरह का खाना पकाकर खाते हैं, इन आदतों में बदलाव जरूर किया जा सकता है।
कुछ शोध और स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट्स में खानपान से जुड़े ऐसे जोखिम कारकों का जिक्र किया गया है, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसे में सवाल है—क्या आपकी रोज की थाली में भी ऐसी चीजें शामिल हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं?
आखिर शरीर में कैंसर कैसे विकसित होता है?
कैंसर कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो अचानक एक दिन में विकसित हो जाए। इसमें शरीर की कुछ कोशिकाओं में बदलाव होने लगता है और वे अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। कई मामलों में ये कोशिकाएं आसपास के ऊतकों को प्रभावित कर सकती हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकती हैं।
इसी वजह से विशेषज्ञ कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच पर जोर देते हैं।
ज्यादा नमक और रेड मीट से बढ़ सकता है जोखिम
खानपान से जुड़े कुछ ऐसे पैटर्न हैं, जिनका लंबे समय तक अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है।
1. ज्यादा नमक वाला खाना
डाइट में बहुत अधिक नमक का सेवन स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता। विशेष रूप से बहुत नमकीन और संरक्षित खाद्य पदार्थों का लगातार ज्यादा सेवन पेट के कैंसर के जोखिम से जुड़ा पाया गया है।
2. रेड मीट का ज्यादा सेवन
रेड मीट का बहुत अधिक सेवन भी कुछ कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है। इसलिए डाइट में इसकी मात्रा और सेवन की आवृत्ति पर ध्यान देना जरूरी है।
3. फाइबर की कमी
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों की कमी वाली डाइट भी अच्छी नहीं मानी जाती। डाइट में पर्याप्त फाइबर रखना पाचन तंत्र के साथ-साथ ओवरऑल हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण है।
तला और बहुत ज्यादा तापमान पर पकाया खाना भी चिंता का विषय
खाना सिर्फ क्या है, यह ही नहीं बल्कि उसे किस तरह पकाया जा रहा है, यह भी मायने रखता है।
बहुत ज्यादा तापमान पर कुछ खाद्य पदार्थों को पकाने से ऐसे रासायनिक यौगिक बन सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए भोजन को बार-बार बहुत तेज आंच पर तलने या अत्यधिक जला हुआ खाना खाने से बचना बेहतर है।
शराब और अचार वाले खाने को लेकर भी सावधानी
शराब का सेवन कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाने से जुड़ा हुआ है। इसमें मुंह, गले, भोजन नली, लिवर, आंत और स्तन कैंसर समेत कई प्रकार शामिल हैं।
वहीं, बहुत अधिक नमक वाले संरक्षित खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन भी पेट के कैंसर के जोखिम से जुड़ा पाया गया है।
कैंसर से बचाव के लिए कैसी हो आपकी डाइट?
कैंसर को पूरी तरह रोकने की कोई एक डाइट नहीं है। हालांकि, स्वस्थ और संतुलित खानपान कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
अपनी डाइट में इन चीजों को शामिल करने की कोशिश करें—
- साबुत अनाज और मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, मक्का और जौ
- पर्याप्त फल और हरी सब्जियां
- फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ
- दालें, बीन्स और अन्य पौधों से मिलने वाले प्रोटीन
- पर्याप्त मात्रा में पानी
- जरूरत के अनुसार कैल्शियम और विटामिन-D के स्रोत
- कम प्रोसेस्ड और कम नमक वाला भोजन
ग्रीन टी को भी संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इसे कैंसर से बचाव का इलाज या गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
सिर्फ डाइट ही नहीं, इन आदतों पर भी दें ध्यान
कैंसर का जोखिम केवल खानपान से तय नहीं होता। तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, कुछ संक्रमण, पर्यावरणीय कारक और पारिवारिक इतिहास समेत कई दूसरे कारण भी भूमिका निभा सकते हैं।
इसलिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को छोड़ने से कैंसर से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं मिलती। सबसे बेहतर तरीका है कि संतुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन और तंबाकू से दूरी जैसी आदतों को अपनाया जाए।
जरूरी बात
ज्यादा नमक, रेड मीट, प्रोसेस्ड या बहुत तला-भुना खाना कम करना और फल-सब्जियों व फाइबर से भरपूर संतुलित डाइट लेना स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प है। हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ को कैंसर का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा। कैंसर के जोखिम और डाइट से जुड़े दावों के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता दें।









