‘सर, किताबें नहीं हैं… फिर स्कूल कैसे जाऊंगी? मेरी किताबें तो बह गईं…’, कृतिका की फरियाद पर डीसी ने तुरंत लिया संज्ञान, 24 घंटे में हरकत में आया प्रशासन
पलामू में बाढ़ के कारण 5वीं कक्षा की कृतिका की किताबें और स्कूल का सामान बर्बाद हो गया। बच्ची की फरियाद पर DC ने 24 घंटे में शैक्षणिक सामग्री देने के निर्देश दिए।

पलामू। “सर, मैं पढ़ना चाहती हूं, लेकिन मेरी सारी किताबें-कॉपियां बह गयी हैं…” पांचवीं कक्षा की छात्रा कृतिका कुमारी की यह फरियाद जब डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत तक पहुंची तो उन्होंने बच्ची को निराश नहीं लौटाया। कृतिका अपनी मां के साथ जन समाधान दिवस में पहुंची थी। बाढ़ में उसका स्कूल बैग, किताबें, कॉपियां और पढ़ाई का जरूरी सामान बर्बाद हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह तुरंत नया सामान खरीद सके।
बच्ची की परेशानी सुनते ही डीसी ने शिक्षा विभाग को 24 घंटे के भीतर उसकी पढ़ाई का जरूरी सामान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। परिवार के पास दोबारा सामान खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे में कृतिका अपनी मां के साथ सीधे डीसी के पास पहुंच गई।
जन समाधान दिवस में पहुंची बच्ची ने अपनी समस्या अधिकारियों को बताई। उसकी बात सुनने के बाद डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि कृतिका की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया जाएगा और 24 घंटे के भीतर उसके लिए जरूरी शैक्षणिक सामग्री की व्यवस्था की जाएगी।
बाढ़ में बह गया छात्रा का स्कूल बैग
कृतिका मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर-2 स्थित बैंक कॉलोनी के पास रहती है और कक्षा पांच में पढ़ती है। पिछले दिनों भारी बारिश के बाद कोयल नदी का जलस्तर बढ़ने से इलाके में बाढ़ की स्थिति बन गई थी।
पानी घर में घुसने के बाद परिवार का काफी सामान खराब हो गया। इसी दौरान कृतिका की किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग, यूनिफॉर्म और पढ़ाई से जुड़ी दूसरी सामग्री भी बर्बाद हो गई। बाढ़ से प्रभावित परिवार के लिए इन चीजों को तुरंत दोबारा खरीदना मुश्किल था।
पढ़ाई छूटने के डर से मां के साथ पहुंची डीसी के पास
बाढ़ के बाद कृतिका के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि स्कूल में पढ़ाई कैसे जारी रखे। उसके पास न किताबें थीं और न ही कॉपियां। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बच्ची ने अपनी मां के साथ प्रशासन से मदद मांगने का फैसला किया।दोनों जन समाधान दिवस में डीसी के पास पहुंचीं। वहां कृतिका ने अपनी परेशानी बताई और पढ़ाई के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराने की मांग की।
डीसी ने शिक्षा विभाग को दिए तत्काल निर्देश
बच्ची की समस्या सुनने के बाद डीसी ने इसे प्राथमिकता से लिया। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए और कहा कि बाढ़ के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।निर्देश के मुताबिक कृतिका को उसकी कक्षा के अनुसार पाठ्य पुस्तकें, कॉपियां, स्कूल बैग, ज्योमेट्री बॉक्स और जरूरी स्टेशनरी उपलब्ध कराई जाएगी। स्कूल प्रबंधन के साथ समन्वय कर यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बच्ची को आगे पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी न हो।
राहत के बीच पढ़ाई बचाने की कोशिश
बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास का काम अपनी जगह जारी है, लेकिन कृतिका का मामला यह दिखाता है कि प्राकृतिक आपदा का असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ता है। जिन परिवारों के पास दोबारा किताब-कॉपी खरीदने की क्षमता नहीं होती, उनके बच्चों के सामने स्कूल छूटने का खतरा पैदा हो जाता है।
कृतिका की शिकायत पर प्रशासन की तत्काल पहल से अब उसके स्कूल लौटने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। बाढ़ ने उसका पढ़ाई का सामान जरूर छीन लिया, लेकिन समय पर मिली प्रशासनिक मदद ने उसकी पढ़ाई जारी रहने की उम्मीद जगा दी है।









