धनबाद: मां की गवाही ने बेटे को पहुंचाया सलाखों के पीछे, भाभी पर कुल्हाड़ी से हमले में 7 साल की सजा

धनबाद। धनबाद में भाभी पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने आरोपी बेणु गोराई को 7 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में सबसे अहम बात यह रही कि आरोपी के खिलाफ उसकी अपनी मां की गवाही अदालत में महत्वपूर्ण साबित हुई। वहीं, दो महिला आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।मामले की सुनवाई धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश पारस कुमार सिन्हा की अदालत में हुई। अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक अवधेश कुमार ने पक्ष रखा।
भाई की पत्नी से विवाद के बाद उठाई कुल्हाड़ी
मामला सितंबर 2021 का है। पुटकी निवासी सविता देवी ने घटना को लेकर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के मुताबिक, 19 सितंबर 2021 की सुबह करीब छह बजे बेणु गोराई ने सविता देवी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की।
आरोप है कि जब सविता देवी ने इसका विरोध किया तो बेणु गोराई ने कुल्हाड़ी से उन पर हमला कर दिया। हमले में वह घायल हो गईं। घटना के बाद परिजनों ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। सविता देवी की शिकायत पर 21 सितंबर 2021 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
बेटे के खिलाफ मां की गवाही बनी अहम कड़ी
इस मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन ने कुल 10 गवाहों का परीक्षण कराया। लोक अभियोजक अवधेश कुमार के अनुसार, आरोपी के खिलाफ उसकी अपनी मां ने अदालत में बयान दिया।मां की गवाही को अभियोजन की ओर से मामले में अहम साक्ष्य बताया गया। अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर बेणु गोराई को दोषी ठहराया गया।यानी जिस मामले में आरोपी पर अपनी ही भाभी पर जानलेवा हमला करने का आरोप था, उसमें उसकी अपनी मां की गवाही बेटे के खिलाफ महत्वपूर्ण कड़ी बन गई।
2022 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 11 मई 2022 को आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद अदालत ने 9 दिसंबर 2022 को आरोप तय किए और मामले की सुनवाई शुरू हुई।लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बेणु गोराई को दोषी पाया और उसे 7 साल के कारावास तथा 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
दो महिला आरोपियों को मिला संदेह का लाभ
मामले में आरोपी कुंती देवी और लक्ष्मी कुमारी को अदालत से राहत मिली। दोनों को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।इस फैसले में सबसे ज्यादा चर्चा आरोपी की मां की गवाही की हो रही है, जिसने अभियोजन के मामले को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।









