रांची: झारखंड के स्कूलों में आवारा कुत्तों की एंट्री पर पूरी तरह रोक, शिक्षा परियोजना परिषद का सख्त आदेश
झारखंड के सभी स्कूलों में आवारा कुत्तों के प्रवेश और ठिकाना बनाने पर रोक लगाई गई है। शिक्षा परियोजना परिषद ने सुरक्षा, स्वच्छता और मॉनिटरिंग को लेकर 7 निर्देश जारी किए हैं।

रांची। प्रदेश के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सख्त कदम उठाया है। स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश और उनके ठिकाना बनाने पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के ‘सिटी हाउंडेड बाय स्ट्रेज, किड्स पे प्राइस’ मामले में दिए गए आदेश के आलोक में राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके तहत स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ आवारा कुत्तों की रोकथाम के लिए ठोस इंतजाम करने होंगे।
लापरवाही हुई तो अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि स्कूल और शैक्षणिक परिसरों में आवारा कुत्तों के हमले से विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने भी ऐसे मामलों में जिम्मेदार प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी है।इसी के तहत सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों (BEEO) को निर्देशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने और इसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।
स्कूलों में बाउंड्री से लेकर कचरा प्रबंधन तक पर जोर
शिक्षा परियोजना परिषद ने स्कूलों की सुरक्षा और स्वच्छता के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। विद्यालयों में मजबूत बाउंड्रीवाल, गेट और पर्याप्त सुरक्षा घेरा सुनिश्चित करना होगा, ताकि आवारा कुत्ते परिसर में प्रवेश न कर सकें।इसके अलावा प्रत्येक स्कूल में परिसर की स्वच्छता और आवारा कुत्तों की रोकथाम के लिए एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा। नोडल पदाधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर स्कूल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शित करना होगा। इसकी जानकारी स्थानीय नगर निकाय को भी उपलब्ध कराई जाएगी।
बच्चों को भी दी जाएगी जागरूकता की जानकारी
विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, कुत्ते के काटने की स्थिति में प्राथमिक उपचार तथा तत्काल सूचना देने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाएगा।स्कूल परिसर में भोजन के बचे हुए हिस्से समेत कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य भोजन की तलाश में आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं को स्कूल परिसर की ओर आने से रोकना है।
हर तीन महीने में होगी स्कूलों की जांच
निर्देशों के अनुसार विद्यालय स्तर पर प्रत्येक तीन महीने में निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं आवारा कुत्तों ने स्कूल परिसर में अपना ठिकाना तो नहीं बना लिया है।इसके साथ ही स्कूलों में नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
जिलेवार तैयार होगी अनुपालन रिपोर्ट
सभी जिलों से शैक्षणिक संस्थानों की कुल संख्या और वहां सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेजी जाएगी।
शिक्षा विभाग के इस कदम के बाद अब स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। खासकर ऐसे विद्यालय जहां बाउंड्री, गेट, स्वच्छता या कचरा प्रबंधन की व्यवस्था कमजोर है, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करनी होगी।









