Jharkhand Exam News: अब प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी मामले की होगी विशेष अदालत में सुनवाई, पेपर लीक और नकल के मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट गठित
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए रांची में विशेष अदालत गठित की गई है। जानिए पूरी जानकारी।

रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक, नकल और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अब विशेष न्यायिक व्यवस्था तैयार कर दी गई है। राज्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए रांची में विशेष अदालत का गठन किया गया है। इसी बेंच में अब परीक्षा संबंधी मामलों की सुनवाई होगी।
इस संबंध में न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए अपर न्यायायुक्त प्रथम, रांची की अदालत को पूरे झारखंड के लिए विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। अब झारखंड प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े अनुचित साधनों के मामलों की सुनवाई इसी विशेष अदालत में की जा सकेगी।
2023 के कानून के तहत बनी विशेष अदालत
दरअसल यह आदेश झारखंड हाई कोर्ट की ओर से 17 अप्रैल 2025 को जारी किए गए पत्र और विधि विभाग के प्रधान सचिव सह विधि परामर्शी की ओर से 7 अप्रैल 2025 को जारी अधिसूचना के आधार पर जारी किया गया है।अधिसूचना में झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के नियंत्रण एवं रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2023 की धारा 26 के तहत अपर न्यायायुक्त प्रथम की अदालत को विशेष अदालत के रूप में नामित किया गया है।इसका क्षेत्राधिकार केवल रांची तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे झारखंड राज्य तक होगा।
पेपर लीक और नकल के मामलों की होगी सुनवाई
नई व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों को एक अलग न्यायिक श्रेणी में दर्ज किया जाएगा। धारा 26 के तहत दर्ज होने वाले सभी मुकदमों को सिविल कोर्ट रांची के CIS में ‘Examination Case’ यानी परीक्षा मामले की श्रेणी में दर्ज किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर मामलों की सुनवाई को एक विशेष अदालत के माध्यम से आगे बढ़ाना है।इसके दायरे में परीक्षा में पेपर लीक, नकल, तकनीकी गड़बड़ी और अन्य अनुचित साधनों से जुड़े मामले आ सकते हैं। इससे ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए पूरे राज्य में एक केंद्रीकृत न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी पर सरकार सख्त
झारखंड में पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई परीक्षाओं में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की त्रुटियों, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी और अनुचित साधनों के आरोप सामने आए हैं।
ऐसे मामलों में अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। एक ओर जहां हजारों उम्मीदवार लंबे समय तक तैयारी करते हैं, वहीं परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।विशेष अदालत के गठन के बाद ऐसे मामलों की कानूनी कार्रवाई को एक निश्चित न्यायिक मंच मिल सकेगा।
पूरे राज्य के मामलों पर रहेगा अधिकार
विशेष अदालत की सबसे महत्वपूर्ण बात इसका राज्यव्यापी क्षेत्राधिकार है। यानी मामला झारखंड के किसी भी जिले से संबंधित हो, यदि वह अधिनियम की संबंधित धारा के तहत आता है तो उसकी सुनवाई के लिए रांची स्थित नामित विशेष अदालत का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इससे अलग-अलग जिलों में एक जैसी प्रकृति के मामलों की सुनवाई के लिए अलग व्यवस्था बनाने की आवश्यकता कम होगी और मामलों को एक विशेष न्यायिक ढांचे के तहत आगे बढ़ाया जा सकेगा।
अभ्यर्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह व्यवस्था?
प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर अभ्यर्थियों पर पड़ता है। परीक्षा रद्द होने या जांच लंबी चलने की स्थिति में उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है और भर्ती प्रक्रिया में भी देरी होती है।विशेष अदालत बनने से ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट मंच मिलने की उम्मीद है। इससे परीक्षा से जुड़े विवादों और अनुचित साधनों के मामलों में न्यायिक कार्रवाई को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा पर झारखंड HC सख्त, CID जांच का आदेश
झारखंड हाई कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति परीक्षा, विज्ञापन संख्या 2/2025 से जुड़े मामले में भी महत्वपूर्ण आदेश दिया है।जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को आपराधिक मामला दर्ज कराने और मामले की जांच CID को सौंपने का निर्देश दिया है। मामला उन 2,819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा से जुड़ा है, जिन्हें पहले आयोजित परीक्षा के बाद फिर से परीक्षा में शामिल कराया गया था।
हाई कोर्ट ने JSSC को निर्देश दिया है कि इन 2,819 अभ्यर्थियों की पहले आयोजित परीक्षा के अंक भी सार्वजनिक किए जाएं।अदालत ने यह भी कहा है कि यदि CID जांच में इन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आता और वे निर्धारित मेरिट में आते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर विचार किया जाए।हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि CID की जांच के निष्कर्ष का असर नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ेगा। यानी जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की नियुक्ति प्रक्रिया तय होगी।









