चाईबासा : बैंक मैनेजर, कर्मचारी व व्यापारी ने मिलकर किया 33 करोड़ का गोलमाल, अब ACB कोर्ट ने सुनायी तीनों को 10-10 और 5 साल साल की सजा

Chaibasa: Bank manager, employee and businessman together embezzled Rs 33 crore; ACB court sentenced all three to 10 and 5 years in prison.

सरायकेला सहकारी बैंक में हुए 33 करोड़ रुपये के गबन मामले में ACB कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन दोषियों को सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
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चाईबासा। सरायकेला सहकारी बैंक गबन मामले में एसीबी (ACB) कोर्ट ने तीन दोषियों को सख्त सजा दी है। अदालत ने इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए तत्कालीन बैंक मैनेजर और एक व्यापारी को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जबकि एक अन्य बैंक कर्मी को 5 वर्ष की सजा दी गई है।

यह फैसला एसीबी कोर्ट के न्यायाधीश पीयूष श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाया, जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को पर्याप्त और ठोस माना गया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी धन के दुरुपयोग और बैंकिंग नियमों की अनदेखी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इन दोषियों को मिली सजा
अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा और जुर्माना भी निर्धारित किया है।
• तत्कालीन बैंक मैनेजर सुनील कुमार सतपति को 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 1.20 लाख रुपये जुर्माना।
• व्यापारी संजय कुमार डालमिया को 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 1.20 लाख रुपये जुर्माना।
• बैंक कर्मी मनीष देवगम को 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माना।

क्या है पूरा मामला?
यह घोटाला वर्ष 2013-14 के दौरान सरायकेला सहकारी बैंक में हुआ था, जिसमें आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से लगभग 33 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की थी। जांच में सामने आया कि बैंकिंग नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए सरकारी धन का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।
इस बड़े घोटाले का खुलासा वर्ष 2019 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच के दौरान हुआ। इसके बाद मामले की गहन जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंपी गई। जांच के दौरान कई दस्तावेजी साक्ष्य और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ा गया, जिससे पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ।

जांच और सुनवाई में अहम भूमिका
तत्कालीन कोल्हान पुलिस उपाधीक्षक अनिमेष गुप्ता ने इस मामले की विस्तृत जांच की और अदालत में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यह सुनियोजित तरीके से किया गया आर्थिक अपराध है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त सजा ही भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगा सकती है।

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