“शादी से पहले पत्नी का बीमारी छुपाना मानसिक क्रूरता” फैमली कोर्ट का फैसला हाईकोर्ट ने माना सही, कहा, शादी के बाद दायित्व से इनकार अनुचित…
"Wife's concealment of illness before marriage is mental cruelty." The High Court upheld the Family Court's decision, stating that denial of responsibility after marriage is unfair.

Court News : शादी से पहले बीमारी छुपाना और फिर बीमारी की बात कहकर जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेने को हाईकोर्ट ने मानसिक क्रूरता बताया है। पत्नी के इस व्यवहार को अनूचित मानते हुए हाईकोर्ट ने पति को तलाक की इजाजत दे दी है। इससे पहले तलाक की याचिका को फैमिली कोर्ट ने भी स्वीकार कर लिया था, लेकिन पत्नी ने उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, अब हाईकोर्ट ने भी पति के पक्ष में फैसला दिया है।
पूरा मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का है। जहां कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति की तलाक याचिका को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि शादी से पहले बीमारी छिपाना और विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों से विमुख होना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने पति को पत्नी को 5 लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण देने का निर्देश भी दिया है।
दरअसल छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से जुड़े एक वैवाहिक विवाद मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि यदि कोई व्यक्ति शादी से पहले अपनी गंभीर बीमारी की जानकारी छुपाए और शादी के बाद पारिवारिक दायित्वों को निभाने से लगातार इनकार करे, तो यह मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) के दायरे में आता है।
दंपती की शादी से जुड़ा है, जो 5 जून 2015 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई थी। शादी के शुरुआती दो महीने सामान्य रूप से बीते, लेकिन इसके बाद पति-पत्नी के बीच लगातार तनाव बढ़ने लगा।
पति का आरोप: पत्नी ने बीमारी छिपाई और व्यवहार में आया बदलाव
पति ने तलाक की याचिका दायर करते हुए अदालत को बताया कि पत्नी को शादी से पहले पीरियड्स न आने (Menstrual disorder) की गंभीर समस्या थी। यह बात उसने विवाह तय करते समय या शादी से पहले किसी को नहीं बताई। पति ने कहा कि बीमारी के कारण उनके दाम्पत्य संबंध प्रभावित होने लगे, जिससे वह मानसिक तनाव में रहने लगा।
पति ने आगे कहा कि कुछ ही महीनों बाद पत्नी का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। वह न तो घर के बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करती थी और न ही घरेलू कामों में सहयोग देती थी। उसका रवैया परिवार के प्रति कठोर और अपमानजनक था। पति के अनुसार, पत्नी अक्सर कहती—“क्या आपने घर में अनाथालय खोल रखा है?”उसके इस व्यवहार की वजह से घर का माहौल तनावपूर्ण बना रहता था।
फैमिली कोर्ट ने माना मानसिक क्रूरता, पति को दिया तलाक
पति द्वारा लगाए गए आरोपों को सुनने और सबूतों की जांच के बाद फैमिली कोर्ट ने माना कि पत्नी ने शादी से पहले महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई। साथ ही, विवाह के बाद भी उसने वैवाहिक कर्तव्यों का पालन नहीं किया और पति को लगातार मानसिक पीड़ा पहुंचाई।इन्हीं आधारों पर फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका मंजूर कर ली थी।
पत्नी की अपील हाईकोर्ट ने की खारिज
पत्नी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन डिवीजन बेंच—जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेश कुमार प्रसाद—ने सभी तथ्यों को देखने के बाद पाया कि पति-पत्नी के संबंध सुधारने की कोई संभावना नहीं है।कोर्ट ने कहा कि—गंभीर बीमारी छिपाना धोखाधड़ी है। वैवाहिक कर्तव्य न निभाना गलत और यह सब पति के साथ मानसिक क्रूरता के बराबर है।इस आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना और पत्नी की अपील खारिज कर दी।
4 महीने में 5 लाख रुपये भरण-पोषण देने का आदेश
हालांकि कोर्ट ने तलाक को बरकरार रखा, लेकिन पत्नी को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए पति को निर्देश दिया कि वह 4 महीने के भीतर पत्नी को 5 लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण के रूप में दे।









