झारखंड- चर्चित रूपेश हत्याकांड में स्पेशल कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, तीन आरोपी दोषी, दो बरी, जानिये क्या हुआ था 6 फरवरी 2022 को…

बहुचर्चित रूपेश पांडेय हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए मामले को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है, जबकि दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। सजा पर सुनवाई 5 फरवरी को होगी।
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Jharkhand Court News : बहुचर्चित रूपेश पांडेय हत्याकांड में करीब तीन साल बाद न्यायिक प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि दो आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। पूरा मामला हजारीबाग का है, जहां दोषी ठहराए गए आरोपियों में मो. असलम अंसारी उर्फ असलम उर्फ पप्पू मियां, मो. कैफ और मो. गुरफान शामिल हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दोषियों की सजा के बिंदु पर सुनवाई 5 फरवरी को होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि उन्हें कितनी अवधि की सजा दी जाएगी।

वहीं, ट्रायल का सामना कर रहे मो. इरफान और इशिकार मियां को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष और प्रशासन की नजरें अब सजा के ऐलान पर टिकी हुई हैं।

जानिये क्या है पूरा घटनाक्रम
यह सनसनीखेज हत्याकांड 6 फरवरी 2022 को हुआ था। उस दिन शाम करीब 5 बजे रूपेश पांडेय अपने चाचा के साथ बरही में आयोजित सरस्वती पूजा देखने गए थे। पूजा विसर्जन जुलूस के दौरान माहौल अचानक उग्र हो गया और एक उन्मादी भीड़ ने रूपेश पांडेय को घेरकर बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया था।

घटना के बाद बरही थाना में 27 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 7 फरवरी 2022 को मामले में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, घटना की गंभीरता और इसके व्यापक असर को देखते हुए यह मामला जल्द ही राज्यव्यापी चर्चा का विषय बन गया।

हत्या के बाद फैला था सांप्रदायिक तनाव
रूपेश पांडेय की हत्या के बाद क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। आक्रोशित लोगों ने जीटी रोड को जाम कर दिया और उग्र प्रदर्शन के दौरान कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। हालात इतने बिगड़ गए कि राज्य सरकार को पहली बार पांच जिलों में इंटरनेट सेवा बंद करने का फैसला लेना पड़ा, ताकि अफवाहों पर रोक लगाई जा सके और स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

यह मामला झारखंड विधानसभा में भी गूंजा, जहां विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। घटना की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी, जिसके बाद मामला न्यायिक हस्तक्षेप तक पहुंचा। अंततः झारखंड हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2022 को इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने मामले की गहन जांच की और चार्जशीट दाखिल की। अब सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले ने इस लंबे और संवेदनशील मामले में एक अहम पड़ाव तय कर दिया है। आने वाले 5 फरवरी को होने वाली सजा की सुनवाई पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं

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