JPSC ACF Exam 2025: 7 सवालों के सभी विकल्प गलत, चार बार बदली Answer Key; अब परीक्षा ही रद्द
JPSC ACF Exam 2025 में 7 प्रश्नों के सभी विकल्प गलत पाए गए। मॉडल Answer Key चार बार बदली गई। मुख्य परीक्षा में भी त्रुटियां मिलीं और अब सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी है।

रांची। झारखंड में परीक्षा को लेकर विवाद खत्म होता नहीं दिख रहा है। दरअसल पिछले दिनों सरकार की तरफ से रद्द की गई 22 प्रतियोगी परीक्षाओं की सूची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सहायक वन संरक्षक (ACF) नियुक्ति परीक्षा भी शामिल है। करीब 78 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती परीक्षा को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे।
दरअसल प्रारंभिक परीक्षा की Answer Key में लगातार बदलाव और कई प्रश्नों के विकल्पों में त्रुटियां सामने आने के बाद परीक्षा की प्रक्रिया विवादों में आ गई थी।सबसे गंभीर मामला प्रारंभिक परीक्षा के सात प्रश्नों से जुड़ा रहा, जिनके दिए गए सभी विकल्प गलत पाए गए। अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर विचार करने के बाद आयोग ने इन प्रश्नों के लिए सभी उम्मीदवारों को एक-एक अंक देने का फैसला किया।
इसका अर्थ यह हुआ कि अभ्यर्थी ने प्रश्न का उत्तर दिया हो, सही विकल्प चुना हो या प्रश्न को छोड़ दिया हो, उसे इन सवालों के अंक दिए गए। प्रतियोगी परीक्षाओं में एक अंक भी अंतिम मेरिट में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। ऐसे में सभी अभ्यर्थियों को सात प्रश्नों के अंक दिए जाने के फैसले ने परीक्षा की निष्पक्षता और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए।
चार बार बदली गई मॉडल Answer Key
JPSC की इस परीक्षा में मॉडल उत्तर एक बार नहीं, बल्कि चार बार संशोधित किए गए। अलग-अलग चरणों में कुछ प्रश्नों के उत्तर बदले गए, जबकि कई प्रश्नों में दिए गए विकल्पों को ही गलत माना गया।
25 जुलाई 2025 को जारी हुई पहली Answer Key
13 जुलाई 2025 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के बाद आयोग ने 25 जुलाई 2025 को प्रारंभिक मॉडल उत्तर जारी किए थे। अभ्यर्थियों से मॉडल उत्तर को लेकर आपत्तियां मांगी गई थीं।
26 अगस्त को हुआ पहला संशोधन
आपत्तियों की समीक्षा के बाद 26 अगस्त 2025 को संशोधित मॉडल उत्तर जारी किया गया। इसमें चार प्रश्न ऐसे पाए गए जिनके सभी विकल्प गलत थे। आयोग ने इन प्रश्नों के लिए सभी अभ्यर्थियों को एक-एक अंक देने का निर्णय लिया। इसके साथ ही कुछ अन्य सवालों के उत्तर भी बदले गए।
13 अक्टूबर को दूसरी बार संशोधन
इसके बाद 13 अक्टूबर 2025 प्रतिभा रानी बनाम सूरज कुमार का मामला
भारत के सुप्रीम कोर्ट में एक केस आया था. प्रतिभा रानी बनाम सूरज कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्त्रीधन और दहेज में फर्क साफ किया था. प्रतिभा रानी ने दहेज दिया था, मगर उसके ससुराल-जन और दहेज मांग रहे थे. बाद में प्रतिभा रानी को घर से बाहर कर दिया गया. प्रतिभा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने स्त्रीधन की व्याख्या कुछ इस प्रकार की-
• -शादी समारोह से पहले मिले गिफ्ट
• -शादी के दौरान मिले उपहार
• -प्यार में मिले सभी तरह के गिफ्ट
• -दुल्हन के माता-पिता और भाई से मिले सभी गिफ्टको दूसरी संशोधित Answer Key जारी की गई। इसमें दो और प्रश्नों के सभी विकल्प गलत बताए गए और उन पर भी सभी अभ्यर्थियों को एक-एक अंक देने की व्यवस्था की गई। इस चरण में तीन अन्य प्रश्नों के उत्तर भी बदले गए।
12 नवंबर को फिर बदली गई Answer Key
12 नवंबर 2025 को तीसरी बार मॉडल उत्तर में संशोधन किया गया। इस बार दो अन्य प्रश्नों के उत्तर बदले गए, जबकि एक प्रश्न के सभी विकल्प गलत माने गए।
25 नवंबर को चौथा संशोधन
इसके बाद 25 नवंबर 2025 को एक बार फिर संशोधित मॉडल उत्तर जारी किया गया। इसमें एक अन्य प्रश्न के उत्तर में बदलाव किया गया।इस तरह प्रारंभिक परीक्षा के मॉडल उत्तरों में कई चरणों में बदलाव हुआ और अंततः सात प्रश्नों के सभी विकल्प गलत पाए जाने की स्थिति सामने आई।
मुख्य परीक्षा का प्रश्नपत्र भी रहा विवादों में
ACF भर्ती परीक्षा केवल प्रारंभिक परीक्षा की Answer Key को लेकर ही विवाद में नहीं रही। इसकी मुख्य परीक्षा के एक प्रश्नपत्र में भी बड़ी संख्या में भाषाई और शाब्दिक त्रुटियां सामने आई थीं।प्रश्नपत्र में मौजूद गलतियों को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई। इसके बावजूद आयोग ने मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। सफल अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच के लिए कार्यक्रम भी निर्धारित कर दिया गया था।बाद में पूरी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर CID जांच शुरू हुई। इसके बाद राज्य सरकार ने ACF परीक्षा को भी रद्द कर दिया।
हाई कोर्ट से भी नहीं मिली रोक
सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देते हुए मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार हाई कोर्ट ने सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक नहीं लगाई है।इससे ACF भर्ती परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है और अभ्यर्थियों के सामने दोबारा परीक्षा या आगे की भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
एक-एक अंक का फैसला क्यों बना बड़ा मुद्दा?
प्रतियोगी परीक्षाओं में कटऑफ के आसपास रहने वाले उम्मीदवारों के लिए एक अंक भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि किसी प्रश्न का सही विकल्प उपलब्ध नहीं हो और उस प्रश्न के लिए सभी उम्मीदवारों को अंक दिए जाएं, तो मेरिट पर उसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।ACF परीक्षा में सात ऐसे प्रश्न सामने आने के कारण यह मुद्दा और गंभीर हो गया। इसके अलावा Answer Key में बार-बार संशोधन होने से अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर असमंजस भी बढ़ा।
अब परीक्षा रद्द होने के बाद क्या?
राज्य सरकार द्वारा 22 प्रतियोगिता परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले में ACF परीक्षा भी शामिल है। इसलिए इस भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों को आगे की प्रक्रिया के लिए सरकार, JPSC और संबंधित आधिकारिक आदेशों पर नजर रखनी होगी।नई परीक्षा, आवेदन प्रक्रिया या भर्ती को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने आने पर उसी के आधार पर आगे की तैयारी करनी होगी।
JPSC की सहायक वन संरक्षक भर्ती परीक्षा में मॉडल Answer Key के चार बार संशोधन, सात प्रश्नों के सभी विकल्प गलत पाए जाने और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र में त्रुटियों के कारण परीक्षा प्रक्रिया सवालों के घेरे में रही। इसके बाद CID जांच शुरू हुई और राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी।अब अभ्यर्थियों की नजर इस बात पर है कि सरकार और आयोग आगे इस भर्ती को किस तरह पूरा करते हैं और क्या नई परीक्षा के जरिए चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाती है।









