Sprouts vs Microgreens: स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स में क्या है अंतर? जानिए कितने दिन में होते हैं तैयार और कौन ज्यादा फायदेमंद
दोनों को हेल्दी डाइट का हिस्सा माना जाता है, लेकिन इन्हें उगाने का तरीका, तैयार होने का समय और खाने का तरीका बिल्कुल अलग है

आजकल हेल्दी और पौष्टिक डाइट को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स जैसे फूड्स भी लोगों की डाइट में तेजी से जगह बना रहे हैं। स्प्राउट्स का इस्तेमाल सलाद, चाट, सैंडविच और पोहा जैसी कई डिशेज में किया जाता है। वहीं माइक्रोग्रीन्स को सलाद, सूप, सैंडविच और दूसरी डिशेज में मिलाने के साथ-साथ गार्निशिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, देखने में दोनों छोटे पौधों जैसे लग सकते हैं, लेकिन स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स एक जैसे नहीं होते। दोनों को उगाने का तरीका, तैयार होने में लगने वाला समय और पौधे का कौन-सा हिस्सा खाया जाता है, इन सभी में अंतर होता है। आसान शब्दों में समझें तो स्प्राउट्स बीज के अंकुरित होने की शुरुआती अवस्था है, जबकि माइक्रोग्रीन्स पौधे की उससे आगे की अवस्था में मिलने वाली छोटी पत्तियां होती हैं।
स्प्राउट्स क्या होते हैं?
स्प्राउट्स बीजों को अंकुरित करने के बाद मिलने वाले छोटे पौधे होते हैं। इन्हें तैयार करने के लिए आमतौर पर मूंग, चना, अल्फाल्फा और दूसरी दालों या बीजों को पानी में भिगोया जाता है। कुछ समय बाद बीजों से छोटी जड़ और अंकुर निकलने लगते हैं और इन्हें स्प्राउट्स कहा जाता है।
स्प्राउट्स को तैयार करने के लिए आमतौर पर मिट्टी की जरूरत नहीं होती। सही तापमान और नमी मिलने पर कई तरह के बीज कुछ ही दिनों में अंकुरित हो जाते हैं। सामान्य तौर पर स्प्राउट्स लगभग 2 से 5 दिनों में खाने के लिए तैयार हो सकते हैं, हालांकि बीज के प्रकार और वातावरण के अनुसार समय अलग हो सकता है।
माइक्रोग्रीन्स क्या होते हैं?
माइक्रोग्रीन्स पौधों की बेहद छोटी और कोमल पत्तियां होती हैं। इन्हें बीज से उगाया जाता है और आमतौर पर मिट्टी या किसी दूसरे ग्रोइंग मीडियम की जरूरत होती है। जब पौधे में शुरुआती पत्तियां निकल आती हैं और पौधा थोड़ा विकसित हो जाता है, तब माइक्रोग्रीन्स को काटकर इस्तेमाल किया जाता है।
मूली, सरसों, धनिया, मटर, ब्रोकोली और सूरजमुखी जैसे कई पौधों के माइक्रोग्रीन्स घर पर भी उगाए जा सकते हैं। आमतौर पर इन्हें बीज बोने के करीब 7 से 21 दिनों के बीच काटा जा सकता है। कुछ किस्में इससे पहले या बाद में भी तैयार हो सकती हैं।
स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स में क्या अंतर है?
स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी ग्रोथ स्टेज और उन्हें उगाने के तरीके का है। स्प्राउट्स को आमतौर पर पानी और उचित तापमान की मदद से अंकुरित किया जाता है, जबकि माइक्रोग्रीन्स को मिट्टी या किसी ग्रोइंग मीडियम में उगाया जाता है।
स्प्राउट्स बहुत कम समय में तैयार हो जाते हैं। इनमें अंकुर के साथ बीज और छोटी जड़ भी खाई जाती है। इसके विपरीत माइक्रोग्रीन्स में मुख्य रूप से पौधे का छोटा तना और शुरुआती पत्तियां इस्तेमाल की जाती हैं।
खाने के तरीके में भी अंतर है। स्प्राउट्स को सलाद, चाट, सैंडविच, पोहा और दूसरी डिशेज में सीधे शामिल किया जा सकता है। माइक्रोग्रीन्स का इस्तेमाल सलाद, सूप, पोहा और सैंडविच में करने के अलावा खाने को आकर्षक बनाने के लिए गार्निशिंग में भी किया जाता है।
कितने दिन में तैयार होते हैं स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स?
स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स को तैयार होने में अलग-अलग समय लगता है। स्प्राउट्स कई मामलों में 2 से 5 दिनों के भीतर तैयार हो सकते हैं और कुछ प्रकारों में एक सप्ताह तक भी लग सकता है।
माइक्रोग्रीन्स को आमतौर पर थोड़ा अधिक समय चाहिए। कई किस्में लगभग 7 से 21 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं। हालांकि, यह समय पौधे की किस्म, तापमान, रोशनी, नमी और उगाने के तरीके पर निर्भर करता है।
क्या माइक्रोग्रीन्स स्प्राउट्स से ज्यादा हेल्दी हैं?
स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स दोनों में पोषक तत्व पाए जा सकते हैं और दोनों को संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि इनमें से एक विकल्प हर व्यक्ति के लिए दूसरे से ज्यादा हेल्दी है।
माइक्रोग्रीन्स में पौधे की शुरुआती पत्तियां और तना शामिल होते हैं, इसलिए इनमें अलग-अलग तरह के विटामिन, मिनरल्स और अन्य पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जा सकते हैं। वहीं स्प्राउट्स भी प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों का स्रोत हो सकते हैं। इनमें पोषण की मात्रा बीज की किस्म और उगाने की स्थिति के अनुसार बदलती है।
अगर आप अपनी डाइट में इन्हें शामिल करना चाहते हैं तो अलग-अलग तरह के स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स को भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, खासकर कच्चे स्प्राउट्स को साफ-सफाई और सुरक्षित तरीके से तैयार करना जरूरी है, क्योंकि अंकुरित बीजों में बैक्टीरियल संक्रमण का जोखिम हो सकता है।









