झारखंड हाईकोर्ट न्यूज: असिस्टेंट टीचर नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, सरकार व उपायुक्तों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही खत्म
Jharkhand High Court News: High Court delivers verdict in assistant teacher recruitment case; contempt proceedings against the government and Deputy Commissioners dropped.

रांची। शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा अहम फैसला सुनाया है। झारखंड हाईकोर्ट ने असिस्टेंट टीचर नियुक्ति से जुड़े अवमानना मामले में राज्य सरकार और विभिन्न जिलों के उपायुक्तों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सरकार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही समाप्त कर दी है।
कोर्ट ने माना कि उसके पूर्व आदेश के अनुसार याचिकाकर्ताओं के मामलों पर दोबारा विचार किया जा चुका है और उसके बाद नियमानुसार निर्णय लिया गया है।पुनर्विचार के दौरान अधिकारियों ने पाया कि संबंधित श्रेणियों में चयनित अंतिम अभ्यर्थियों की तुलना में याचिकाकर्ताओं के अंक कम थे।
इसी आधार पर उनकी असिस्टेंट टीचर पद पर नियुक्ति का दावा खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इसे अपने पूर्व आदेश का अनुपालन माना और अवमानना की कार्यवाही समाप्त करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
2023 के हाईकोर्ट आदेश का पालन नहीं करने का आरोप
मामला कंटेम्प्ट केस (सिविल) संख्या 269/2024 से जुड़ा है। प्रदुमन प्रसाद साहू, दिलीप कुमार, गोपाल साव और सुदीप कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि 17 अक्टूबर 2023 को WP(S) संख्या 1896/2022 में हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी।
सरकार ने कहा- दोबारा जांच के बाद लिया गया फैसला
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एसी टू सीनियर एससी-द्वितीय निरुपमा ने अदालत के समक्ष सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि संबंधित सभी उपायुक्तों की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया है।सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट के 17 अक्टूबर 2023 के आदेश के अनुपालन में याचिकाकर्ताओं के मामलों की दोबारा समीक्षा की गई।
समीक्षा के बाद संबंधित श्रेणियों में चयनित अंतिम अभ्यर्थियों के अंक और याचिकाकर्ताओं के अंकों की तुलना की गई।इस प्रक्रिया में पाया गया कि याचिकाकर्ताओं के अंक अपनी-अपनी श्रेणी में चयनित अंतिम अभ्यर्थियों से कम हैं। इसके बाद उन्हें असिस्टेंट टीचर पद पर नियुक्ति के लिए अयोग्य मानते हुए उनके दावों को अस्वीकार कर दिया गया।
कोर्ट ने कहा- आदेश का हो चुका है अनुपालन
राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने माना कि पूर्व में दिए गए न्यायालय के आदेश के अनुरूप याचिकाकर्ताओं के मामलों पर पुनर्विचार कर निर्णय लिया जा चुका है।ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने सभी विपक्षी पक्षों के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही समाप्त कर दी और मामले का निपटारा कर दिया।
नियुक्ति के फैसले को चुनौती देने का रास्ता खुला
हालांकि हाईकोर्ट के इस आदेश से याचिकाकर्ताओं के लिए आगे का कानूनी रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि वे पुनर्विचार के बाद पारित आदेशों से असंतुष्ट हैं, तो कानून के तहत उपलब्ध उचित कानूनी उपाय अपना सकते हैं।
यानी अवमानना का मामला फिलहाल खत्म हो गया है, लेकिन याचिकाकर्ता पुनर्विचार के बाद नियुक्ति का दावा खारिज किए जाने वाले आदेश को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दे सकते हैं।









